डॉ सिद्धार्थ गुप्ता
कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमितों के लक्षण पहले के मुकाबले काफी गंभीर देखने को मिल रहे हैं। इस बार संक्रमित हो रहे ज्यादातर लोगों को सांस लेने से संबंधित समस्याएं ज्यादा हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस में हुए म्यूटेशन के कारण लोगों को सांस की तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमितों के फेफड़ों को वायरस तेजी से कमजोर कर रहा है, जिसके कारण लोगों को निमोनिया और फेफड़ों में होने वाले गंभीर संक्रमणों का भी सामना करना प़ड़ रहा है।
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोविड से संक्रमित सभी रोगियों को फेफड़ों का संक्रमण होने का डर है? आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं।
कोरोना के यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान, फेफड़ों में संक्रमण की ओर हो सकता है संकेत
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो वायरस के डबल और ट्रिपल म्यूटेंट स्ट्रेन जैसे नए वैरिएंट्स के कारण लोगों के फेफड़ों में संक्रमण के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। यहां तक कि लक्षणों के मौजूद होने के बाद भी जिन लोगों का कोविड टेस्ट नकारात्मक आया है उनमें सीटी स्केन और छाती के एक्स-रे के बाद संक्रमण का पता चल रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार महामारी की पहली लहर की तुलना में इस बार लोगों में संक्रमण का असर तेजी से हो रहा है। कई मामलों में देखने को मिला है कि दो से तीन दिनों के भीतर ही रोगी की स्थिति काफी गंभीर हो जा रही है। इसी संबंध में जॉन हॉपकिंस मेडिसिन विभाग द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि डॉक्टरों को कोविड संक्रमितों के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि इस बार इनमें तेजी से परिवर्तन होते देखा जा रहा है।
फेफड़ों में संक्रमण के संकेत हो सकते हैं यह लक्षण
एंटी कोरोना टास्क फोर्स, नोएडा के डॉ सिद्धार्थ गुप्ता बताते हैं कि कोरोना के कुछ लक्षण फेफड़ों में होने वाले संक्रमण का संकेत हो सकते हैं। यदि आपको ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो इस संकेत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। आमतौर पर यह तब होता है जब वायरस तेजी से फैलने लगता है और फेफड़ों में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवेश बिंदु को अवरुद्ध करता है।
कोविड संक्रमण में होने वाली निमोनिया फिलहाल सबसे खतरनाक जटिलताओं में से एक बनी हुई है। संक्रमित व्यक्ति में वायरस, फेफड़ों की दीवारों को अवरुद्ध करके तमाम अंगों को होने वाली रक्त की आपूर्ति को कम कर देता है। ऐसी स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। जैसे-जैसे वायु की थैलियां क्षतिग्रस्त होती हैं उसमें से एक प्रकार के तरल पदार्थ का प्रवाह होता है, जो निमोनिया का कारण बन जाती है।