Medically Reviewed by Dr. Sudhir Chaudhary
क्षय रोग एवं श्वसन रोग विशेषज्ञ, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी (क्षय रोग एवं श्वसन रोग)
अनुभव- 38 वर्ष
देशभर में फैली कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने कई वजहों से लोगों को चिंता में डाल दिया है। पहली बात तो ये कि यह लहर पहले के मुकाबले काफी अधिक जानलेवा है और दूसरी बात कि कई लोगों की टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आ रही है, जबकि उनमें कोरोना के लक्षण साफ-साफ दिख रहे हैं। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोरोना की जांच के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट सबसे बेहतर होता है, लेकिन दूसरी लहर में यह उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है और विशेषज्ञ इसके पीछे कई तरह की वजहें मानते हैं।
सावधान: कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आए तो भी इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, खुद पर दें ध्यान
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कोरोना की इस दूसरी लहर में कई म्यूटेट वैरिएंट का मिश्रण देखने को मिल रहा है। कई विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट नए म्यूटेट वैरिएंट का पता लगा पाने में असमर्थ है। इसके अलावा कई लोगों में लक्षण दिखने के बावजूद उनकी टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने का कारण यह भी बताया जा रहा है कि हो सकता है सैंपल सही से न लिया गया हो या शरीर में वायरल लोड बहुत कम हो, इसलिए रिपोर्ट निगेटिव आ रही हो।
टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आए, तो भी रहें सतर्क
- अगर आपको कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई हो तो निश्चिंत न हों बल्कि सतर्क रहें। सबसे पहले तो आपको लक्षण दिखें तो खुद को आइसोलेट कर लें और लक्षणों पर ध्यान देते रहें। साथ ही डॉक्टरों से सलाह भी लेते रहें।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- गंध और स्वाद की क्षमता का चले जाना, बहुत तेज बुखार आना, बहुत ज्यादा थकावट महसूस होना, गले में खराश, सूखी खांसी और डायरिया आदि की समस्या हो तो इन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। ये कोरोना के सबसे आम लक्षणों में से हैं।
लक्षण दिखने पर क्या करें?
- अगर आपके लक्षण सामान्य हैं तो होम आइसोलेशन में रहें और कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। जैसे- हवादार कमरे में रहें, जिसमें खिड़कियां और वेंटिलेटर हों और किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में न आएं। इसके अलावा पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते रहें। अगर सांस लेने में कठिनाई महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अस्पताल जाएं।
नोट: डॉ. सुधीर चौधरी रेस्पिरेटरी मेडिसिन में क्वालिफाइड कंसल्टेंट हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया, फिर इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से ही एमडी (क्षय रोग एवं श्वसन रोग) की पढ़ाई पूरी की। इनके पास आईएमए की सदस्यता भी है। डॉ. सुधीर चौधरी को इस क्षेत्र में 38 साल का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।