कुछ लोगों का मानना है कि जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होगी कोरोना वायरस का प्रकोप खत्म होता जाएगा। लेकिन जानकार कहते हैं कि महामारियां, आमतौर पर मौसमी बीमारियों के वायरस जैसी नहीं होतीं। ऐसी बहुत सी बीमारियां हैं जो मौसम बदलते समय सिर उठाती हैं। जैसे ही मौसम स्थिर होता है, वो खत्म हो जाती हैं। मौसमी बुखार इसकी सबसे आम मिसाल है। इसी तरह टायफाइड या खसरा अक्सर गर्मी के मौसम में सिर उठाती है।
भारत में कोरोना वायरस का कहर क्या गर्मी बढ़ने से खत्म हो जाएगा?
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कोविड-19 असल में सार्स (SARS) कोरोना वायरस के परिवार से है। इस नए कोरोना वायरस का आधिकारिक नाम कोविड-19 ही है। सार्स वायरस 2003 में फैला था और इतने कम समय में खत्म हो गया कि रिसर्चरों को इसके मौसमी चक्र के बारे में पता लगाने का मौका ही नहीं मिला। इसीलिए रिसर्च के लिहाज से ये वायरस बहुत ही नया है। लेकिन कोरोना वायरस परिवार के अन्य सदस्यों से हमें कोविड-19 के बारे में कई इशारे मिलते हैं।
10 साल पहले ब्रिटेन में एक स्टडी की गई थी। इसमें तीन तरह के कोरोना वायरस के सैम्पल ऐसे मरीजों से लिए गए थे जिन्हें सांस के जरिए संक्रमण हुआ था। वहीं एक सैम्पल ऐसे मरीज से लिया गया था जिसे सर्जरी के दौरान संक्रमण हुआ था। इन सभी में वायरस का मौसमी चक्र नजर आता है। इससे इशारा मिला कि तीन तरह के कोरोना वायरस दिसंबर से अप्रैल महीने के बीच सक्रिय होते हैं। जबकि सर्जरी वाले मरीज को संक्रमित करने वाला चौथा वायरस रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करने वाला था।
फिलहाल तो रिसर्चर यही मान रहे हैं कि कोविड-19 ठंडे और सूखे माहौल में ही पनपता है। लेकिन अभी जिन देशों में इस वायरस ने पनाह ली है, उनमें बहुत गर्म और उमस वाले देश भी शामिल हैं। हालांकि बहुत सी अप्रकाशित रिसर्च में यही दावा किया गया है कि बढ़ता तापमान इस वायरस की गति को धीमा कर देगा। लेकिन, बहुत से जानकार इससे सहमत नहीं हैं। फिलहाल रिसर्चर सिर्फ कंप्यूटर मॉडलिंग पर ही यकीन कर रहे हैं और उसी के आधार पर बात कर रहे हैं।
वायरस पर मौसम का असर नहीं?
जानकारों का कहना है कि महामारियां अक्सर आम बीमारियों के मौसम चक्र की पाबंद नहीं होतीं। मिसाल के लिए स्पेनिश फ्लू भीषण गर्मी के मौसम में अपने चरम पर पहुंचा था। वहीं कई अन्य महामारियां सर्दी के मौसम में फैली थीं। स्वीडन में संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ जैन एल्बर्ट को उम्मीद है कि आगे इस वायरस पर मौसम का असर नहीं पड़ेगा। अगर ऐसा होता है तो आगे चलकर कोविड-19 एक स्थानीय वायरस बनकर रह जाएगा।
लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या उस वक्त भी ये वायरस एक महामारी बनने की क्षमता रख पाएगा। फिलहाल तो रिसर्चर इसकी संभावना देख ही रहे हैं। 'कोरोना' वायरस के पूरे परिवार को- 'एनवेलप्ड वायरस' कहते हैं। इन वायरस पर प्रोटीन की एक परत होती है। इसे कोरोना इसलिए कहते हैं कि इसकी सतह पर क्राउन या ताज की तरह नोकें निकली दिखती हैं। वायरस के इस परिवार में नया सदस्य है कोविड-19। इस तरह के प्रोटीन की परत वाले वायरस में अक्सर मौसम चक्र की मार झेलने की क्षमता अधिक होती है।
रिसर्च पहले ही ये बात साबित कर चुकी हैं कि SARS-Cov-2 40 फीसद उमस और 21 से 23 तापमान के बीच प्लास्टिक और स्टील की सतह पर 72 घंटे जिंदा रह सकता है। लेकिन कोविड-19 के बारे में कहा जा रहा है कि ये 4 डिग्री सेल्सियस तापमान में 28 दिन तक जिंदा रहने की क्षमता रखता है। हालांकि, अभी ये साफतौर पर नहीं कहा जा सकता कि इसे जिंदा रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा और कम से कम कितने तापमान की जरूरत है। इस वायरस का उमस से क्या रिश्ता है, ये भी अभी देखना बाकी है।
2003 में फैलने वाला सार्स (SARS) वायरस भी ठंडे और खुश्क वातावरण में ही फलता फूलता था। मिसाल के लिए सूखा सार्स वायरस 22 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान और 40-50 फीसद नमी के माहौल में पांच दिन से ज्यादा संक्रमण फैलाने की क्षमता रखता है। नमी और तापमान जैसे-जैसे बढ़ता है वायरस कमजोर पड़ता जाता है।
स्पेन के रिसर्चर स्कॉलर मिगुएल अराजो का कहना है कि वायरस, वातावरण में जितनी देर जिंदा रह सकता है, उसका खतरा उतना ही गहराता जाता है। SARS-Cov-2 सारी दुनिया में तेजी से फैला था। लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर वहीं रहा जहां सूखा और ठंडा वातावरण था।
मरीजों की संख्या बढ़ेगी?
मिगुएल अराजो मानते हैं कि अगर कोविड-19 पर मौसम, नमी और तापमान का वही असर पड़ता है, जैसा कि अन्य वायरस पर तो इसका मतलब है कि अलग-अलग समय में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। एक अन्य स्टडी के मुताबिक कोविड-19 ऐसे देश और इलाकों में तेजी से फैला है, जहां औसत तापमान 5 से 11 डिग्री सेल्सियस रहता है। और नमी आमतौर पर कम रहती है। लेकिन उष्णकटिबंधीय देशों में भी खासी संख्या में कोरोना मरीज देखने को मिले हैं।
एशिया में तापमान यूरोपीय और अमरीकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। फिर भी नया कोरोना वायरस यहां तेजी से फैल रहा है। लिहाजा कहना मुश्किल है कि ज्यादा तापमान होने पर कोविड-19 कमजोर पड़ जाएगा। फिलहाल कोरोना वायरस इंसानों के संपर्क के कारण बढ़ रहा है। जैसे ही मौसम बदलेगा, इंसान का बर्ताव भी बदलेगा। तब हो सकता है कि कोरोना पर भी इसका असर पड़े।
मिसाल के लिए यूरोप में खसरा का वायरस स्कूल जाने वाले बच्चों में होता है। लेकिन जैसे ही बच्चों के स्कूल की छुट्टियां होती हैं, बच्चों का मिलना-जुलना कम होता है, वायरस भी कमजोर पड़ जाता है। चीन में 25 जनवरी को लूनर नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़े पैमाने पर लोग वुहान में जमा हुए थे। और वहीं से ये वायरस तेजी से फैला।