हाल के कुछ वर्षों में भागदौड़ भरी जिंदगी और हमारी दिनचर्या में ऐसा बदलाव आ चुका है कि इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हमारे खानपान और कमजोरी का असर आंखों की रोशनी पर भी पड़ता है। यही कारण है कि पहले के दौर में जहां बुजुर्गों को चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती थी, आज की जेनरेशन में बचपन में ही चश्मे की जरूरत होने लगी है। आंखों की रोशनी का कमजोर होना आज के समय में एक गंभीर विषय बन गया है, जिस बारे में सोचना बहुत ही जरूरी है।
Prevention of Blindness Week 2020: इन 5 आदतों को अपनाने से 60 की उम्र के बाद भी रहेगी आंखों की रोशनी बरकरार
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खानपान पर ध्यान
अगर इंसान का खानपान सही रहे तो किसी भी तरह की कोई बीमारी नहीं होगी। पौष्टिक और संतुलित आहार के माध्यम से इंसान स्वस्थ रहते हुए लंबे जीवन का सफर तय कर सकता है। आंखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन सी, विटामिन ई, ओमेगा -3 फैटी एसिड, ल्यूटिन और जस्ता जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की आवश्यकता पूरी करने के लिए आपको अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली, अंडे, घी, नट्स, दाल, बीन्स संतरे और अन्य खट्टे फलों को शामिल करना चाहिए।
धूम्रपान से दूरी
धूम्रपान यानी स्मोकिंग शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके फेफड़े समेत आंखों की रोशनी के लिए बेहद हानिकारक है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि धूम्रपान करने से ड्राई आई, मैक्यूलर डिजनरेशन, डायबिटिक रेटिनोपैथी, आई सिंड्रोम और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से धूम्रपान करने वाले लोगों को आंखों से जुड़ी समस्याएं जरूर होती हैं। इसलिए आंखों की सेहत के लिए धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।
UV किरणों से आंखों की रक्षा
तेज धूप में बाहर निकलते वक्त आंखों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाना चाहिए। इन हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से मैक्यूलर डिजनरेशन और मोतियाबिंद का खतरा हो सकता है। इन किरणों से बचने के लिए खासकर गर्मी के मौसम में आपको यूवी प्रोटेक्टर चश्मे का उपयोग करना चाहिए।
लैपटॉप या फोन ज्यादा न चलाएं
लैपटॉप या फोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से आंखों की रोशनी कम हो सकती है। बहुत देर कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन देखने के कारण आपकी नजर धुंधली हो सकती है। साथ ही सिरदर्द और कंधे में दर्द समेत कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लैपटॉप पर ज्यादा देर तक काम करना है तो एंटी-ग्लेयर स्क्रीन का इस्तेमाल करें। हर दो घंटे के बाद आपको कम से कम 15 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए।