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H1N1 Risk: स्वाइन फ्लू से संक्रमित हो गए हैं तो घबराएं नहीं, जानिए घर पर क्या करें और कब जाएं अस्पताल?

Mon, 24 Aug 2026 07:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 24 Aug 2026 07:26 PM IST
सार

स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के ज्यादातर मामले फ्लू जैसे लक्षणों के साथ होते हैं और कई मरीज ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है। आराम और पर्याप्त तरल जरूरी हैं, जबकि जोखिम वाले या गंभीर मरीजों में डॉक्टर की सलाह से एंटीवायरल दवा जल्दी शुरू की जा सकती है। सांस की परेशानी और सीने में दर्द को नजरअंदाज न करें।

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स्वाइन फ्लू की समस्या का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

स्वाइन फ्लू इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। दिल्ली-एनसीआर में इसके मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में इस बार स्वाइन फ्लू के मामलों में 6 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन दिनों अस्पतालों में भी सर्दी-जुकाम, तेज बुखार और फ्लू की समस्या के शिकार लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है।



डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो स्वाइन फ्लू, मौसमी बुखार-खांसी के ही जैसा होता है, ज्यादातर लोग इससे आसानी से ठीक भी हो जाते हैं। हालांकि छोटे बच्चे-बुजुर्गों, कमजोर इम्युनिटी वाले और पहले से बीमार लोगों में ये गंभीर बीमारी और मौत तक का कारण बन सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, स्वाइन फ्लू को लेकर दो बातों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। पहला, हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानकर घबराएं नहीं और दूसरा सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर संकेतों को सामान्य वायरल बुखार समझकर घर पर इंतजार न करते रहें।

अब सवाल ये है कि अगर आपको स्वाइन फ्लू का संक्रमण हो जाए तो फिर क्या करें? घर पर रहें या फिर डॉक्टर के पास जाएं?

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स्वाइन फ्लू के लक्षण - फोटो : Adobe Stock

मौसमी बुखार जैसा हो होता है स्वाइन फ्लू ़

इंटेंसिव केयर के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा कहते हैं, स्वाइन फ्लू  संक्रमण के लक्षण आम मौसमी फ्लू जैसे ही होते हैं। इसमें मरीजों को अचानक बुखार, खांसी, गले और सिर में दर्द, शरीर में दर्द के साथ थकान और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त भी हो सकते हैं।
 

  • यहीं सबसे बड़ा भ्रम होता है। इन लक्षणों के आधार पर अकेले यह तय नहीं किया जा सकता कि आपको को एच1एन1 ही है। 
  • कई दूसरे श्वसन संक्रमण में भी लगभग ऐसे ही लक्षण होते हैं। कोविड के दौर में भी यही समस्याएं हो रही थीं।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com

सांस की दिक्कतों और सीन में दर्द को न लें हल्के में

फ्लू में कमजोरी और बुखार हो सकता है, लेकिन अगर सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाए, सांस फूलने लगे, सीने में दर्द हो या बहुत ज्यादा सुस्ती हो रही हो तो इसे सामान्य फ्लू मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
 

  • गंभीर फ्लू संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है। 
  • गंभीर या तेजी से बढ़ती बीमारी में दवा जल्दी शुरू करना जरूरी हो जाता है। ऐसे मरीजों को डॉक्टर एंटीवायरल उपचार दे सकते हैं।
  • बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से कुछ पुरानी बीमारियों वाले मरीजों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है।
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स्वाइन फ्लू का खतरा, कब जाएं डॉक्टर के पास - फोटो : Freepik.com

स्वाइन फ्लू हो जाए तो क्या करें?

डॉक्टर बताते हैं, हल्के फ्लू में शरीर को आराम देना, पर्याप्त तरल लेना और बुखार या दर्द में डॉक्टर की सलाह पर दवा लेने से आपकी दिक्कतें काफी हद तक कम हो सकती हैं। लेकिन स्वाइन फ्लू का इलाज केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। 
 

  • मरीज की स्थिति का ध्यान रखें और अगर बीमारी बढ़ती दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। 
  •  यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बुखार कम हो जाना हमेशा बीमारी पूरी तरह खत्म होने का संकेत नहीं है। अगर सांस संबंधी लक्षण बढ़ रहे हैं या कमजोरी लगातार बढ़ रही है, तो फिर से डॉक्टर की सलाह लें। 


कब घर पर रहें और कब डॉक्टर के पास जाएं

डॉक्टर कहते हैं, स्वाइन फ्लू में हर मरीज को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं होती। अधिकतर लोग हल्के संक्रमण के साथ घर पर ठीक हो सकते हैं।
 
अगर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द हो या बहुत ज्यादा कमजोरी-बेहोशी जैसा महसूस हो तो समय रहते डॉक्टरी मदद जरूर लें। उच्च जोखिम वाले लोगों में शुरुआत में ही डॉक्टर से सलाह ले लेनी चाहिए।  बीमारी में कभी भी खुद से कोई भी दवा या फिर एंटीबायोटिक न लें। डॉक्टर के बताए सलाह का ही पालन करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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