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बढ़ते पार्टिकुलेट प्रदूषण से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियां 

Tue, 23 Feb 2021 02:21 AM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Tue, 23 Feb 2021 02:21 AM IST
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the spread of particulate pollution may increase chances of corona infection and lung infection
बचने का सबसे आसान तरीका है प्राकृतिक उपचार - फोटो : अमर उजाला

लगभग 60% सांस से सम्बंधित समस्या से पीड़ित लोग उत्तर भारत के हैं। फेफड़े / श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लगभग 53% लोग पहले से ही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ जैसे कि डायबिटीज,हाइपरटेंशन और मोटापा इत्यादि से पीड़ित हैं। हाल ही में जिंदल नेचरक्योर द्वारा अध्ययन में बढ़ते पार्टिकुलेट प्रदूषण के दुषपरिणामों के रूप में कोरोना संक्रमण के बढ़ने और श्वसन संबंधी समस्याओं के होने संभावनाएं सामने आई हैं और इनसे बचने का सबसे आसान तरीका है प्राकृतिक उपचार। अगली स्लाइड्स से जानिए किस प्रकार है यह अध्ययन। 

the spread of particulate pollution may increase chances of corona infection and lung infection
पार्टिकुलेट प्रदूषण में काफी वृद्धि देखी गयी है - फोटो : Social media

इस तरह बढ़ जाती हैं कोरोना की संभावनाएं
पिछले कुछ समय में पार्टिकुलेट प्रदूषण में काफी वृद्धि देखी गयी है। 1998 से हर साल पार्टिकुलेट प्रदूषण 42% की औसत दर से बढ़ रहा है। बढ़ता वायु प्रदूषण स्तर एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि यह पुरानी फेफड़ों की बीमारी, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक, डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा देता है।  इनमें से कुछ बीमारियों की पहचान पहले से मौजूद चिकित्सा स्थितियों के रूप में की गई है जो कोरोनोवायरस संक्रमण के बढ़ने और मृत्यु दर की संभावना को बढ़ा सकती हैं।

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इन्फेक्शन से सावधान रहने की जरुरत है - फोटो : Social media

इस प्रकार है शोध
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक ऑनलाइन स्टडी के अनुसार 93% मरीजों का मानना है कि कोविड के बाद वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है, इससे कई सांस से सम्बंधित समस्याएँ बढ़ रही है, और उनमें से 39% मरीज इन्ही सांस से सम्बंधित समस्याओं से पीड़ित हैं। साथ ही 53% लोग इस समय के दौरान लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याओं जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापे आदि का सामना कर रहे हैं, इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इन्फेक्शन से सावधान रहने की जरुरत है।

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ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है - फोटो : सोशल मीडिया

गंभीर बीमारी वालों को रहना होगा सतर्क
जिंदल नेचरक्योर की चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ बबीना एनएम ने कहा, “दिल्ली, बेंगलुरु, गाजियाबाद, और अन्य शहरों में जहां वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, वहां पर लोगों को विशेष रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गंभीर बीमारियों को लेकर सतर्क होने की आवश्यकता है। पुरानी मेडिकल समस्याओं वाले लोगों को कोविड से पहले के मुकाबले इस समय ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। 

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ज्यादातर लोग भारत के उत्तरी शहरों जैसे कि दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़ आदि के हैं - फोटो : social media

फेफड़ों में संक्रमण की बढ़ रही है शिकायत
अध्ययन के अनुसार चिकित्सकों ने वर्चुअल सेशन में यह देखा है कि लोग सांस से सम्बंधित समस्याओं और फेफड़े के इन्फेक्शन की शिकायत ज्यादा कर रहे है और इनमे से ज्यादातर लोग भारत के उत्तरी शहरों जैसे कि दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़ आदि के हैं। डायबिटीज, मोटापे और हायपरटेंशन के मरीजों में साँस से सम्बंधित समस्या ज्यादा देख रहे है। इन्हीं लोगों की रोग- प्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो यह आसानी से कोरोना संक्रमित हो जाते हैं। 

 

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