लगभग 60% सांस से सम्बंधित समस्या से पीड़ित लोग उत्तर भारत के हैं। फेफड़े / श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लगभग 53% लोग पहले से ही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ जैसे कि डायबिटीज,हाइपरटेंशन और मोटापा इत्यादि से पीड़ित हैं। हाल ही में जिंदल नेचरक्योर द्वारा अध्ययन में बढ़ते पार्टिकुलेट प्रदूषण के दुषपरिणामों के रूप में कोरोना संक्रमण के बढ़ने और श्वसन संबंधी समस्याओं के होने संभावनाएं सामने आई हैं और इनसे बचने का सबसे आसान तरीका है प्राकृतिक उपचार। अगली स्लाइड्स से जानिए किस प्रकार है यह अध्ययन।
बढ़ते पार्टिकुलेट प्रदूषण से बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियां
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इस तरह बढ़ जाती हैं कोरोना की संभावनाएं
पिछले कुछ समय में पार्टिकुलेट प्रदूषण में काफी वृद्धि देखी गयी है। 1998 से हर साल पार्टिकुलेट प्रदूषण 42% की औसत दर से बढ़ रहा है। बढ़ता वायु प्रदूषण स्तर एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि यह पुरानी फेफड़ों की बीमारी, हाइपरटेंशन, स्ट्रोक, डायबिटीज और हार्ट अटैक जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा देता है। इनमें से कुछ बीमारियों की पहचान पहले से मौजूद चिकित्सा स्थितियों के रूप में की गई है जो कोरोनोवायरस संक्रमण के बढ़ने और मृत्यु दर की संभावना को बढ़ा सकती हैं।
इस प्रकार है शोध
जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक ऑनलाइन स्टडी के अनुसार 93% मरीजों का मानना है कि कोविड के बाद वायु प्रदूषण में वृद्धि हुई है, इससे कई सांस से सम्बंधित समस्याएँ बढ़ रही है, और उनमें से 39% मरीज इन्ही सांस से सम्बंधित समस्याओं से पीड़ित हैं। साथ ही 53% लोग इस समय के दौरान लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याओं जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, मोटापे आदि का सामना कर रहे हैं, इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इन्फेक्शन से सावधान रहने की जरुरत है।
गंभीर बीमारी वालों को रहना होगा सतर्क
जिंदल नेचरक्योर की चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ बबीना एनएम ने कहा, “दिल्ली, बेंगलुरु, गाजियाबाद, और अन्य शहरों में जहां वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, वहां पर लोगों को विशेष रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से गंभीर बीमारियों को लेकर सतर्क होने की आवश्यकता है। पुरानी मेडिकल समस्याओं वाले लोगों को कोविड से पहले के मुकाबले इस समय ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है।
फेफड़ों में संक्रमण की बढ़ रही है शिकायत
अध्ययन के अनुसार चिकित्सकों ने वर्चुअल सेशन में यह देखा है कि लोग सांस से सम्बंधित समस्याओं और फेफड़े के इन्फेक्शन की शिकायत ज्यादा कर रहे है और इनमे से ज्यादातर लोग भारत के उत्तरी शहरों जैसे कि दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़ आदि के हैं। डायबिटीज, मोटापे और हायपरटेंशन के मरीजों में साँस से सम्बंधित समस्या ज्यादा देख रहे है। इन्हीं लोगों की रोग- प्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो यह आसानी से कोरोना संक्रमित हो जाते हैं।