कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्राॅन ने दुनिया के तमाम देशों में दस्तक दे दी है। विशेषज्ञ इसे कोरोना के अब तक के सभी वैरिएंट से ज्यादा संक्रामक मान रहे हैं। नए वैरिएंट में कई म्यूटेशन देखे गए हैं, जो इसे वैक्सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित करने में सक्षम बनाते हैं। यूके, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में ओमिक्रॉन तेजी से बढ़ता जा रहा है, वहीं भारत में भी अब तक 200 से अधिक लोगों में इसके संक्रमण की पहचान की जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस वैरिएंट की प्रकृति को लेकर चिंतित हैं। इसके साथ ही कई ऐसे लोगों को भी ओमिक्रॉन से संक्रमित पाया जा रहा है जिनको टीके की दोनों डोज मिल चुकी है और हाल-फिलहाल उन्होंने विदेशों की कोई यात्रा भी नहीं की है।
बड़ा सवाल: क्या कम्युनिटी ट्रांसमिशन की तरफ बढ़ रहा है ओमिक्रॉन? नो-ट्रैवेल हिस्ट्री वाले भी हो रहे हैं संक्रमित
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नो-ट्रैवेल हिस्ट्री और ओमिक्रॉन संक्रमण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वायरस के प्रसार को सीमित करने के लिए सभी लोगों को लगातार कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी जा रही है। बड़ी चिंता इस बात की है कि बिना किसी ट्रैवेल हिस्ट्री वाले लोग भी इससे संक्रमित हो रहे हैं, जो इस बात का संकेत हो सकता है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट अब कम्युनिटी ट्रॉसमिशन की तरफ बढ़ रहा है। भारत में अब तक करीब 11 राज्यों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
नो-ट्रैवेल हिस्ट्री वाले लोगों में ओमिक्रॉन संक्रमण को लेकर वैज्ञानिकों की एक टीम का मानना है कि संभवत: संक्रमण का शिकार हो रहे लोग ऐसे हो सकते हैं जिनका अब तक वैक्सीनेशन नहीं हो सका है। चूंकि अधिकांश आबादी का टीकाकरण हो चुका है, जिससे हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो सकती है, ऐसे में जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। वहीं टीकाकरण करा चुके लोग अगर संक्रमित हो भी रहे होंगे तो ज्यादातर मामले एसिम्टोमेटिक हो सकते हैं।
वैक्सीनेटेड लोगों में संक्रमण को लेकर होना होगा सहज
एक मीडिया रिपोर्ट में यूएस बेस्ड पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विन गुप्ता बताते हैं, “हमें पूरी तरह से वैक्सीनेटेड लोगों के पॉजिटव आने को लेकर सहज होना होगा। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि टीकाकरण का उद्देश्य सकारात्मक परीक्षण को रोकना नहीं है, बल्कि संक्रमण की गंभीरता और इससे अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम करना है। जब तक कोरोना पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है हम सभी को लगातार बिना किसी लापरवाही के कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहना चाहिए।
क्या फ्लू की तरह सालाना वैक्सीनेशन की हो सकती है जरूरत?
ओमिक्रॉन संक्रमण से अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कई देशों ने बूस्टर डोज शुरू कर दी है। इसके अलावा वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वार्षिक वैक्सीनेशन को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। भारत में फिलहाल बूस्टर डोज के लिए भी कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हम सभी को लगातार बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। भीड़-भाड़ वाली जगहों जाने से बचें, मास्क पहनें, हाथ धोएं और सुरक्षित रहें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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