हमारी सेहत कैसी होगी इसमें लाइफस्टाइल का बड़ा योगदान होता है। हम जिस प्रकार की जीवन जीते हैं, जिन आदतों का पालन करते हैं उनका सीधा असर स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यही कारण है कि अध्ययनों में सभी लोगों को अपनी लाइफस्टाइल को ठीक रखने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मौजूदा समय में जितनी भी बड़ी बीमारियों की अक्सर चर्चा होती रहती है, उनमें से ज्यादातर के लिए खराब लाइफस्टाइल एक प्रमुख कारक रहा है।
सेहत की बात: आदत में कर लें बस ये एक बदलाव- इससे हृदय-फेफड़ों के रोग सहित कम हो सकता है तनाव का खतरा
संपूर्ण शरीर के लिए हानिकारक है स्मोकिंग
अगर आप धूम्रपान करते हैं तो इसके दुष्प्रभाव सिर्फ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं हैं, इससे पूरे शरीर को भी नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डालता है। भारत ही नहीं दुनिया की बड़ी आबादी धूम्रपान की आदत की शिकार है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर सिर्फ इसी एक आदत से दूरी बना ली जाए तो हृदय-फेफड़ों के रोग सहित तनाव-डिप्रेशन के खतरे को भी कम किया जा सकता है।
धूम्रपान से फेफड़ों के कैंसर का खतरा
शोधकर्ताओं ने बताया कि जो लोग सिगरेट पीते हैं उनमें फेफड़ों का कैंसर होने या फेफड़ों के कैंसर से मरने की आशंका, धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में 15-30 गुना अधिक हो सकती है। यहां तक कि एक दिन में एक-दो सिगरेट पीने या कभी-कभी धूम्रपान करने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
सिगरेट के धुएं में मौजूद रसायन हमारी कोशिकाओं के लिए हानिकारक है और डीएनए क्षति का भी कारण हो सकती है। कोशिका में डीएनए की क्षति कैंसर का कारण बनता है।
हो सकते हैं हृदय रोगों के शिकार
धूम्रपान हृदय रोग के लिए भी प्रमुख जोखिम कारक है। जब आप धूम्रपान करते हैं तो धुएं के साथ जो रसायन अंदर जाता है, वो आपके दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे आपको एथेरोस्क्लेरोसिस या धमनियों में प्लाक बिल्डअप होने की अधिक आशंका होती है।
एक अध्ययन में पाया गया कि अन्य लोगों की तुलना में क्रोनिक धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक से मौत का खतरा अधिक होता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी धूम्रपान से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में पता चलता है। उदाहरण के लिए, धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वाले लोगों में अवसाद की आशंका दोगुनी होती है, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इसका कारण क्या है।
प्रिस्टिना विश्वविद्यालय में किए शोध में पाया गया कि धूम्रपान करने वालों में से 14% को अवसाद था, यह आदत उन साथियों के लिए भी हानिकारक है जो धूम्रपान तो नहीं करते पर सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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