लंदन से सिंगापुर जा रही सिंगापुर एयरलाइन्स की फ्लाइट मंगलवार (21 मई) को अचानक एयर टर्बुलेंस में फंस गई। आनन-फानन में विमान की आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान टेकऑफ के करीब 10 घंटे बाद म्यांमार के एयरस्पेस में खराब मौसम की वजह एयर टर्बुलेंस में फंस गया। विमान में अचानक से झटके लगने लगे। विमान में क्रू सदस्यों को लेकर करीब 211 लोग सवार थे, इसमें से एक की मौत हो गई जबकि 30 लोग घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
Singapore Flight Turbulence: यात्रियों में पीटीएसडी का हो सकता है खतरा, जानिए क्या होती है ये समस्या
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर क्या है?
पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर एक प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो किसी भयानक घटना से उत्पन्न होती है। किसी घटना का अनुभव करना या उसे देखना मन में डर पैदा कर सकता है। पीटीएसडी का अगर समय पर निदान और उपचार न हो पाए तो इसके कारण दीर्घकालिक रूप से स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
पीटीएसडी के शिकार कई लोगों को अक्सर घटना का फ्लैशबैक, बुरे सपने आने और गंभीर चिंता का अनुभव होता रह सकता है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
अमर उजाला से बातचीत में मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, सिंगापुर फ्लाइट में सवार सभी लोगों की काउंसिलिंग जरूरी है। घटना का अनुभव करने वाले लोगों में डर बैठ सकता है। कुछ लोगों में ये फोबिया का रूप ले सकता है जिसके कारण उनको फ्लाइट में बैठने तक में डर लग सकता है। स्थानीय चिकित्सा विभाग को ऐसे लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।
कैसे होते हैं पीटीएसडी के लक्षण?
पीटीएसडी की समस्या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके कारण चिंता-तनाव और अवसाद जैसे विकारों का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना और उपचार प्राप्त करना आवश्यक है।
- बुरे सपने आना।
- दर्दनाक घटना के फ्लैशबैक, जिसके बाद बदन में कंपन और चिंता बढ़ सकती है।
- लोगों, स्थानों, गतिविधियों और स्थितियों से दूर भागना जो दर्दनाक घटना की याद दिलाते हों।
- क्या हुआ या आप इसके बारे में कैसा महसूस करते हैं, इस बारे में बात करने से बचना।
- अनजान लोगों से मिलने से डर लगना।
पीटीएसडी को कैसे ठीक किया जाता है?
जिन लोगों में पीटीएसडी का निदान किया जाता है, उन्हें मनोचिकित्सा (टॉक थेरेपी) की जरूरत होती है। विशेष रूप से कॉग्नेटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद से लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। थेरेपी की मदद से पीटीएसडी के कारण होने वाली मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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