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सितंबर में मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाती है सर्दी-खांसी और एलर्जी? जानें 4 बड़ी वजहें और बचाव के तरीके
Thu, 17 Sep 2026 12:20 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:20 PM IST
सार
Health Tips: अक्सर मौसम बदलने पर सर्दी-खांसी के मामले बढ़ जाते हैं, इसके पीछे की क्या वजहें हैं आज हम इसी बारे में बात करेंगे।
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सितंबर में मौसम बदलने से क्यों बढ़ जाती हैं सर्दी-खांसी और एलर्जी?
- फोटो : AI
Health Tips: सितंबर में बारिश का असर कम होने लगता है और मौसम धीरे-धीरे बदलने लगता है। दिन में गर्मी, सुबह-शाम हल्की ठंडक और वातावरण में नमी के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव महसूस होता है। इसी दौरान कई लोगों को छींक, नाक बहना, गले में खराश, खांसी या सांस से जुड़ी परेशानी होने लगती है। बच्चों और बुजुर्गों में भी मौसम बदलने के दौरान ऐसी शिकायतें देखने को मिल सकती हैं।
सितंबर में मौसम बदलने से क्यों बढ़ जाती हैं सर्दी-खांसी और एलर्जी?
- फोटो : AI
1. तापमान में अचानक बदलाव
सितंबर में दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ सकता है। सुबह-शाम ठंडक और दिन में गर्मी के कारण शरीर को बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। इस दौरान कुछ लोगों में सांस से जुड़ी शिकायतें बढ़ सकती हैं।
2. वायरल संक्रमण का बढ़ना
बदलते मौसम में श्वसन तंत्र से जुड़े वायरल संक्रमण फैल सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने पर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
सितंबर में दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ सकता है। सुबह-शाम ठंडक और दिन में गर्मी के कारण शरीर को बदलते मौसम के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। इस दौरान कुछ लोगों में सांस से जुड़ी शिकायतें बढ़ सकती हैं।
2. वायरल संक्रमण का बढ़ना
बदलते मौसम में श्वसन तंत्र से जुड़े वायरल संक्रमण फैल सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने पर संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
सितंबर में मौसम बदलने से क्यों बढ़ जाती हैं सर्दी-खांसी और एलर्जी?
- फोटो : AI
3. नमी और फंगस
बारिश के बाद वातावरण में नमी बनी रहती है। घर की दीवारों, बाथरूम या अन्य नम जगहों पर फंगस बढ़ सकता है। इसके कण संवेदनशील लोगों में एलर्जी, छींक और नाक बंद होने जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
4. धूल और प्रदूषण
बारिश के बाद जब सड़कें और वातावरण सूखने लगते हैं, तो धूल के कण हवा में फैल सकते हैं। प्रदूषण के साथ मिलकर ये कण आंख, नाक और गले में जलन पैदा कर सकते हैं तथा एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं।
बारिश के बाद वातावरण में नमी बनी रहती है। घर की दीवारों, बाथरूम या अन्य नम जगहों पर फंगस बढ़ सकता है। इसके कण संवेदनशील लोगों में एलर्जी, छींक और नाक बंद होने जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
4. धूल और प्रदूषण
बारिश के बाद जब सड़कें और वातावरण सूखने लगते हैं, तो धूल के कण हवा में फैल सकते हैं। प्रदूषण के साथ मिलकर ये कण आंख, नाक और गले में जलन पैदा कर सकते हैं तथा एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं।
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सितंबर में मौसम बदलने से क्यों बढ़ जाती हैं सर्दी-खांसी और एलर्जी?
- फोटो : AI
बचाव के लिए क्या करें?
- घर और आसपास की जगह को साफ और सूखा रखें
- धूल या प्रदूषण वाले स्थान पर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं
- हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोएं
- पर्याप्त नींद और संतुलित आहार पर ध्यान दें
- एलर्जी के ज्ञात कारणों से दूरी बनाए रखे
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सितंबर में मौसम बदलने से क्यों बढ़ जाती हैं सर्दी-खांसी और एलर्जी?
- फोटो : AI
कब मिलें डॉक्टर से
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
अगर खांसी या सांस से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहे, तेज बुखार आए, सीने में दर्द हो, सांस लेने में दिक्कत बढ़े या कमजोरी अधिक महसूस हो तो इसे सामान्य मौसमी समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को लक्षण बढ़ने पर अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक, खांसी की दवा या कोई अन्य दवा न लें। गलत दवा या अनावश्यक एंटीबायोटिक का इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।