क्रॉनिक बीमारियों का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है, समय के साथ कम उम्र के लोगों में इसका जोखिम देखा जा रहा है। क्रॉनिक बीमारियां वे स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं जो लंबे समय तक आपको परेशान करती रहती हैं। ये आम तौर पर एक वर्ष या उससे अधिक समय तक बनी रहती हैं। हृदय की बीमारियां इन्हीं का उदाहरण हैं जो लंबे समय तक और कई बार आजीवन बनी रहती हैं। हाल के वर्षों में हार्ट अटैक के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।
Heart Attack: कुछ समय से थी अपच और थकान, जांच में सामने आया हार्ट अटैक; ऐसे लक्षणों को न करें अनदेखा
आमतौर पर हार्ट अटैक की स्थिति में सीने में दर्द, पसीना आने, सांस लेने में तकलीफ सहित कई अन्य समस्याएं देखी जाती रही हैं। पर क्या आप जानते हैं कि बिना इन लक्षणों के भी आपको हार्ट अटैक हो सकता है?
साइलेंट हार्ट अटैक को लेकर भी रहें सावधान
साइलेंट हार्ट अटैक के एक ऐसे ही मामले का जिक्र करते हुए लखनऊ स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टर अरविंद सिंह ने बताया कि हार्ट अटैक में हर बार सीने में दर्द हो या सांस लेने में तकलीफ हो ये जरूरी नहीं है।
उन्होंने बताया, हाल ही में अस्पताल में एक मरीज आया जिसकी जांच में 65% तक की ब्लॉकेज देखी गई। मरीज को पिछले कुछ दिनों से अपच, खाने का मन न करने, अक्सर थकान रहने की समस्या थी। सामान्य दवाओं से जब आराम नहीं मिला तो उसकी जांच की गई जिसके आधार पर डॉक्टरों ने पाया कि उसे साइलेंट हार्ट अटैक था। ब्लॉकेज खत्म करने के लिए आगे की उपचार प्रक्रिया की गई।
अब सवाल उठता है कि हार्ट अटैक तो ठीक है, ये साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है?
डॉक्टर बताते हैं, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है, साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट अटैक जैसे लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं। आमतौर पर हार्ट अटैक के लक्षण या कोई भी लक्षण नजर न आने के कारण साइलेंट हार्ट अटैक की पहचान समय पर नहीं हो पाती है। कई लोगों को अक्सर हफ्तों के बाद इसका पता चल पाता है, जब ब्लॉकेज की समस्या काफी बढ़ जाती है और शरीर में कई प्रकार की गंभीर दिक्कतें होने लग जाती हैं।
हार्ट अटैक और साइलेंट हार्ट अटैक में क्या अंतर है?
साइलेंट हार्ट अटैक और हार्ट अटैक दोनों में नसों में ब्लॉकेज के कारण हृदय में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, इससे हृदय की मांसपेशियों को संभावित रूप से नुकसान होने का जोखिम रहता है। हालांकि, साइलेंट हार्ट अटैक में या तो कोई लक्षण नहीं होता या फिर ऐसे लक्षण दिखते हैं जिसकी पहचान नहीं हो पाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि आमतौर पर इसकी पहचान नहीं हो पाती है या फिर इसका पता तब चलता है जब ब्लॉकेज काफी बढ़ चुका होता है।
फिर इसकी पहचान कैसे की जाए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि हार्ट अटैक के कुल मामलों में से 22 से 30% तक साइलेंट हार्ट अटैक हो सकते हैं। महिलाओं या मधुमेह से पीड़ित लोगों में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें आप आमतौर पर हार्ट अटैक से जोड़कर नहीं देखते। कई स्थितियों में ऐसा भी हो सकता है कि आपको शायद ही पता चले कि आपको हार्ट अटैक हुआ है।
साइलेंट हार्ट अटैक के कारण आपको फ्लू, छाती या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द, अत्यधिक थकान, पाचन की समस्या, चक्कर आने या फिर मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है।
किन्हें साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा अधिक होता है?
हार्ट अटैक या साइलेंट हार्ट अटैक की समस्या वैसे तो किसी को भी हो सकती है, पर कुछ लोगों में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
यदि आपका वजन अधिक है (बीएमआई या बॉडी मास इंडेक्स 25 या उससे अधिक), नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि या व्यायाम नहीं करते हैं, उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, ब्लड शुगर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है या फिर धूम्रपान-तंबाकू का सेवन करते हैं तो ये स्थितियां आपमें हार्ट अटैक या साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं जिसको लेकर अलर्ट रहने की जरूरत है।
--------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।