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Nipah Outbreak: केरल में फिर सामने आया घातक निपाह संक्रमण का मामला, वेंटिलेटर पर है मरीज; जानिए अपडेट

Fri, 09 May 2025 09:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 09 May 2025 09:34 PM IST
सार

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (8 मई) को केरल में मलप्पुरम जिले के वलनचेरी की में एक 42 वर्षीय महिला में निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

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Nipah virus outbreak in kerala latest news and update 42-year-old woman tests positive
केरल में निपाह संक्रमण का मामला - फोटो : Freepik.com

केरल एक बार फिर से निपाह वायरस की चपेट में है। राज्य में साल 2018 से निपाह का प्रकोप देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स में एक नया मामला सामने आया है, जिसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।



स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (8 मई) को केरल के मलप्पुरम जिले में एक 42 वर्षीय महिला में निपाह वायरस के संक्रमण की पुष्टि की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

केरल में एक बार फिर से निपाह का मामला सामने आने के बाद से स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट हो गया है। केरल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मरीज के घर के आस-पास के तीन किलोमीटर के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है। यहां पिछले कुछ वर्षों से नियमित अंतराल पर निपाह के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इससे पहले पिछले साल जून-अक्तूबर तक में राज्य में संक्रमण ने लोगों को खूब परेशान किया था।

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निपाह का हालिया मामला - फोटो : Adobe stock photos

रोगी की हालत गंभीर

हालिया मामले को लेकर जारी रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों से उसे तेज बुखार था, धीरे-धीर लक्षण विकसित होते गए, जिसके बाद परीक्षण में रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

सुरक्षात्मक रूप से अधिकारियों ने रोगी के संपर्क में आए लोगों में भी निपाह का टेस्ट कराया हालांकि किसी अन्य की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं है। 

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2018 से केरल में जारी है निपाह का प्रकोप - फोटो : Freepik.com

संपर्क में आए लोगों का टेस्ट निगेटिव

केरल सरकार ने शुक्रवार को कहा कि मलप्पुरम जिले में निपाह वायरस पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने के बाद कुछ लोगों में बुखार और अन्य लक्षण भी देखे गए थे। हालांकि परीक्षण में सभी छह लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है।स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे जिले में सख्त निवारक उपाय किए जा रहे हैं। 

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, संक्रमित मरीज के संपर्क में आए कुल 49 लोग निगरानी में हैं, लेकिन सभी परिणाम अब निगेटिव आए हैं। निगरानी में रखे गए 49 लोगों में से 12 करीबी पारिवारिक सदस्य हैं।

निपाह को घातक संक्रमण माना जाता रहा है, इसकी मृत्युदर भी अधिक रही है जो निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। 

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आईसीयू में रोगियों को करना पड़ता है भर्ती - फोटो : Freepik.com

पिछले साल भी देखे गए थे संक्रमण के मामले

पिछले साल सितंबर में 24 वर्षीय एक युवक की निपाह संक्रमण से मौत हो गई थी। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नौ सिंतबर को मलप्पुरम में एक 24 वर्षीय युवक की संक्रमण से मौत हो गई थी। इससे पहले जुलाई 2024 में भी एक 14 वर्षीय लड़के की मौत हो गई थी। 

गौरतलब है कि निपाह एक जूनोटिक बीमारी है जो सुअर और चमगादड़ जैसे जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। जानवरों से इंसानों में संक्रमण के अलावा संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों को भी इसका खतरा हो सकता है। इसकी मृत्युदर 45-75 फीसदी तक मानी जाती रही है। साल 2018 से लगातार केरल राज्य इस संक्रमण की चपेट में रहा है।

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निपाह वायरस का खतरा - फोटो : freepik.com

राज्य में अलर्ट जारी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, निपाह कई मामलों में कोरोना से भी खतरनाक संक्रामक रोग माना जाता है। निपाह के कारण इन्सेफलाइटिस जैसी समस्याओं का जोखिम रहता है साथ ही इसका मृत्युदर भी बहुत अधिक रहा है। चमगादड़ों को निपाह वायरस संचार का प्रमुख कारण माना जाता है। चमगादड़ों द्वारा दूषित फलों या अन्य भोजन के माध्यम से ये इंसानों में फैल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फलों-सब्जियों को खाने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करें। पक्षियों द्वारा कटा हुआ फल न खाएं।


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


 
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