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मेंटल हेल्थ: क्या आपका बच्चा भी बात-बात पर झल्लाने लगा है? कहीं ये स्ट्रेस-एंग्जाइटी का संकेत तो नहीं

Fri, 04 Sep 2026 06:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 04 Sep 2026 06:44 PM IST
सार

टीनएजर्स में तनाव और चिंता कई बार सीधे शब्दों में सामने नहीं आती। चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव, पढ़ाई में गिरावट, दोस्तों से दूरी और बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द इसके संकेत हो सकते हैं। जब ये बदलाव लगातार बने रहें और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करें, तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

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Signs of Anxiety in Teenagers Parents Often Miss How to Recognize Stress and Anxiety in Teen
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI

मेंटल हेल्थ की समस्याएं वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही हैं। कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर हाल के वर्षों में लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है। बच्चों के मेंटल हेल्थ को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भी चिंता जताते रहे हैं। बच्चे अपनी समस्याओं को खुलकर बता नहीं पाते, जिससे उनमें बीमारियों के लंबे समय तक निदान न हो पाने की समस्या देखी जाती रही है।



किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं का जोखिम बड़ी चिंता का कारण रहा है। इस उम्र में मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई का दबाव आम लग सकती है। यही वजह है कि कई बार माता-पिता बच्चे में बढ़ते स्ट्रेस या एंग्जाइटी के शुरुआती संकेतों को पहचान भी नहीं पाते हैं। हालांकि कई बार स्ट्रेस-एंग्जाइटी की स्थिति पढ़ाई, नींद या रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर डालने वाली हो सकती है। ऐसे लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है।

क्या आपके घर में भी किसी टीनएजर से साथ इस तरह की कोई दिक्कत है?

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बच्चों में मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : Freepik.com

किशोरों में मेंटल हेल्थ की समस्या

अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री (एएसीएपी) के अनुसार बच्चों और किशोरों में सामान्य रूप से स्ट्र्रेस-एंग्जाइटी होना स्वाभाविक है। समस्या तब बनती है जब चिंता लंबे समय तक बनी रहे या बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा बनने लगे।
 

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किशोरों में एंग्जाइटी का संकेत लगातार चिंता-बेचैनी, चिड़चिड़ापन, किसी बात को लेकर बार-बार आश्वासन मांगना या ऐसी परिस्थितियों से बचना हो सकता है जिनमें पहले वह सामान्य रूप से शामिल होता था।
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मेंटल हेल्थ की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com

माता-पिता देते रहें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी माता-पिता को बच्चों के व्यवहार और दैनिक गतिविधियों पर लगातार ध्यान देते रहना चाहिए। अगर बच्चे के व्यवहार में कुछ समय से बदलाव महसूस कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। 
 

  • बच्चे में चिड़चिड़ापन और गुस्सा तो नहीं बढ़ गया है?
  • दोस्तों और परिवार से दूरी तो नहीं बनाने लगा है?
  • नींद में बदलाव, जैसे सोने में परेशानी या बहुत ज्यादा सोना की आदत
  • बार-बार सिरदर्द, पेट दर्द या मितली जैसी शिकायतें
  • पढ़ाई या स्कूल से अचानक दूरी तो नहीं बनाने लगा है।
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स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

स्ट्रेस और एंग्जाइटी के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किशोरावस्था में स्कूल और परीक्षा का दबाव, भविष्य को लेकर चिंता, दोस्ती और सामाजिक स्वीकार्यता, परिवार में तनाव, बुलिंग जैसी परिस्थितियां तनाव और चिंता को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। हालांकि एंग्जाइटी डिसऑर्डर का कोई एक कारण नहीं होता। सबसे पहले बच्चे को यह महसूस कराना जरूरी है कि उसकी बात सुनी जाएगी और तुरंत डांटा या फैसला नहीं सुनाया जाएगा। 

अगर चिंता या तनाव बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तब विशेषज्ञ से सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए। समय पर डॉक्टरी मदद से समस्या को समझने और उसे ठीक करने में मदद मिल सकती है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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