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अक्सर हम सभी के घरों में पूरी-पकौड़े बनाने के बाद कड़ाही में कुछ तेल शेष बच जाता है। यह तेल बर्बाद न हो जाए, इसलिए अक्सर इसका दोबारा से इस्तेमाल कर लिया जाता हैं, पर क्या आप जानते हैं कि बचे हुए तेल का दोबारा से प्रयोग करना सेहत पर कैसा असर डाल सकता है? तेल के अपव्यय को रोकने का यह तरीका क्या सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है?
बचे हुए तेल के दोबारा उपयोग को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि यह हृदय के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अगर पकौड़े या कुछ तलने वाली चीज बनाने के बाद कड़ाही में कुछ मात्रा में तेल बच जाता है तो दोबारा से खाने के लिए इसको प्रयोग में लाने से बचना चाहिए। एक बार तेल के जलने के बाद उसमें होने वाली रसायनिक क्रियाएं, दोबारा इस्तेमाल के समय सेहत के नुकसान पहुंचा सकती हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
सावधान: कहीं आप भी तो दोबारा इस्तेमाल नहीं करते हैं कड़ाही में बचा हुआ तेल? जरूर जान लीजिए यह बातें
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क्या कहते हैं पोषण विशेषज्ञ?
बचे हुए तेल का दोबारा से उपयोग स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार से नुकसानदायक हो सकता है? इस बारे में जानने के लिए हमने पोषण विशेषज्ञ डॉ अर्चना सक्सेना से बातचीत की। डॉ अर्चना बताती हैं, आमतौर पर पकौड़ों या पूरी बनाने के बाद कड़ाही में बचे हुए तेल को दोबारा से डब्बे में डालकर हम लंबे समय तक इस्तेमाल करते रहते हैं, हालांकि इसका स्वास्थ्य पर काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जब तेल धुआं छोड़ना शुरू करता है, तो यह ट्रांस फैट और पैरा एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन में ऑक्सीकृत हो जाता है। यह सभी स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक हो सकते हैं।
सेहत पर पड़ सकता है बुरा असर
बचे हुए तेल को दोबारा से प्रयोग में लाने को लेकर तमाम अध्ययनों में सेहत पर नकारात्मक प्रभावों के बारे में पता चलता है। चूहों पर किए गए ऐसे ही अध्ययन में पाया गया कि ऐसे तेल का इस्तेमाल कोलेस्ट्रॉल, बीपी, रक्त में एंटीऑक्सीडेंट की गिरावट जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। मौजूदा समय में युवाओं में बढ़ रहे हृदय रोगों के खतरे को रेखांकित करते हुए डॉ अर्चना कहती हैं कि होटलों के अस्वास्थ्यकर भोजन इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। होटल और रेस्तरां में तेल का दोबारा प्रयोग सबसे अधिक किया जाता है।
इन खतरों को लेकर रहें सावधान
डॉ अर्चना कहती हैं, बाहर के खाने को मना करने का एक कारण यह भी है कि वहां हाइजीन के साथ बची हुई चीजों को अगली बार प्रयोग में लाया जाता है। यही कारण है कि कम उम्र में ही लोगों को कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने, हाई-ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम अधिक हो रहा है। तेल के अपव्यय को रोकने के लिए खाना बनाते समय सीमित मात्रा में ही इसका उपयोग करें।
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नोट: यह लेख आहार और पोषण विशेषज्ञ डॉ अर्चना सक्सेना के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ अर्चना, लखनऊ के एक अस्पताल में कार्यरत हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।