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वैज्ञानिकों की चेतावनी: कोरोना का यह वैरिएंट सबसे खतरनाक, ऐसे लोगों में संक्रमण और मौत का खतरा अधिक

Sat, 28 Aug 2021 05:49 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 28 Aug 2021 05:49 PM IST
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Delta variant doubles the risk of Covid hospitalisation and death, experts say
कोरोना का सबसे खतरनाक वैरिएंट डेल्टा (सांकेतिक) - फोटो : pixabay

कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए टीकाकरण को सबसे बेहतरीन हथियार माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में अब तक 62.29 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। वैक्सीन की कमी न होने पाए, इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अब तक स्वदेशी-विदेशी कुल आठ वैक्सीनों के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी है। हालांकि अब भी देश की बड़ी आबादी टीकाकरण नहीं करा रही है। इसी से संबंधित हाल ही में जारी डेटा में बताया गया है कि जिन लोगों ने अभी तक वैक्सीन की एक भी डोज नहीं ली है, उनमें संक्रमण के कारण मौत का खतरा चार फीसदी से अधिक हो सकता है, वहीं वैक्सीन की केवल एक ही खुराक लेने वालों में यह खतरा 1.34 फीसदी से अधिक का हो सकता है।


इस डेटा को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की अपील कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि जिन लोगों को वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी है उन लोगों में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होने का खतरा अधिक हो सकता है। गौरतलब है कि इस समय दुनियाभर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट स्वास्थ्य संगठनों के लिए विशेष चिंता का कारण बना हुआ है।

Delta variant doubles the risk of Covid hospitalisation and death, experts say
डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमण और मौत का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock

डेल्टा वैरिएंटस से संक्रमण और मौत का खतरा
हालिया रिपोर्टस में बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की एक भी शॉट नहीं ली है उनमें डेल्टा वैरिएंटस से संक्रमण और मौत का खतरा अधिक हो सकता है। वहीं जिन लोगों को दोनों खुराक मिल चुकी है उनमें डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमण के बाद मृत्यु दर शून्य प्रतिशत की देखी गई है। इस आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित तीसरी लहर में किसी भी प्रकार की जटिलता से बचे रहने के लिए सभी लोगों को जल्द से जल्द टीकाकरण करा लेना चाहिए।

Delta variant doubles the risk of Covid hospitalisation and death, experts say
डेल्टा वैरिएंट सबसे खतरनाक (सांकेतिक) - फोटो : Social media

डेल्टा वैरिएंट को माना जा रहा है सबसे खतरनाक
दुनियाभर में मौजूदा समय में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट सभी लोगों के लिए विशेष चिंता का कारण बना हुआ है। इसी वैरिएंट को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि कोरोना के अल्फा वैरिएंट्स की तुलना में डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम दो गुना तक हो सकता है। लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है उनके लिए खतरा और अधिक हो सकता है।

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गैर टीकाकृत लोगों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक (सांकेतिक) - फोटो : pixabay

अध्ययन से क्या पता चला
इंग्लैंड में एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट्स से लोगों को बचकर रहने की विशेष आवश्यकता है, इसका खतरा विशेष रूप से उन स्थानों पर अधिक हो सकता है जहां पर टीकाकरण की दर कम है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 29 मार्च से 23 मई 2021 के बीच इंग्लैंड में 43,338 कोविड-19 रोगियों के डेटा का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि इनमें से 24 फीसदी लोगों को वैक्सीन का एक जबकि 74 फीसदी को एक की शॉट नहीं लगा था। सिर्फ 1.8 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्हें दोनों डोज लेने के बाद संक्रमण हुआ।

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कोरोना वैक्सीन सभी लोगों के लिए आवश्यक (सांकेतिक) - फोटो : pixels

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक और पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के महामारी विज्ञानी डॉ गेविन डबरेरा कहते हैं, इस अध्ययन के निष्कर्ष से पता चलता है कि कोरोना के अल्फा वैरिएंट्स की तुलना में डेल्टा से संक्रमित होने वाले लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना काफी अधिक होती है। अध्ययन में देखने को मिला है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उनमें डेल्टा वैरिएंट का खतरा अधिक होता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि डेल्टा वैरिएंट्स से सुरक्षित रखने में वैक्सीन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। 

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स्रोत और संदर्भ: 
Hospital admission and emergency care attendance risk for SARS-CoV-2 delta (B.1.617.2) compared with alpha (B.1.1.7) variants of concern: a cohort study

अस्वीकरण नोट: यह लेख लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।

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