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Mental Health: मेंटल हेल्थ का सीक्रेट फॉर्मूला, रोजाना बस 1 घंटे की आदत 40% तक कम कर सकती है डिप्रेशन का खतरा

Sat, 14 Feb 2026 02:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 14 Feb 2026 02:19 PM IST
सार

Depression Risk Factors: लगातार उदासी रहना, किसी काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, नींद या भूख में कमी, खुद को बेकार महसूस करना, थकान और फोकस की कमी डिप्रेशन के आम संकेत हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। शुरुआती स्तर पर इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से स्थिति को संभाला जा सकता है।

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replacing just an hour of TV or screen with physical activity could reduce the risk of depression
डिप्रेशन के खतरे को कैसे कम किया जाए? - फोटो : Freepik.com

लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी क्रॉनिक बीमारियों का शिकार होते जा रहे हैं। शारीरिक स्वास्थ्य के जोखिमों को देखते हुए हम सभी इसमें सुधार के लिए तो निरंतर प्रयास करते रहते हैं, पर मेंटल हेल्थ को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। हालांकि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के आंकड़े काफी चिंता बढ़ाने वाले हैं।



देश में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 10 से 15% भारतीय वयस्कों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता है। 5.6 करोड़ (4.5% आबादी) भारतीय लोग डिप्रेशन से पीड़ित हैं और 3.8 करोड़ लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। समय के साथ इनका जोखिम बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेंटल हेल्थ में सुधार के लिए सबसे जरूरी है लाइफस्टाइल से संबंधित बदलाव। 

इसी क्रम में विशेषज्ञों की एक टीम ने कहा है कि अगर हम सभी अपनी रोजाना की आदतों में एक आसान सा बदलाव कर लेते हैं तो इससे डिप्रेशन के खतरे को 40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको बहुत ज्यादा समय भी देने की जरूरत नहीं है।

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टीवी देखना छोड़, बढ़ाएं शारीरिक गतिविधियां - फोटो : Adobe Stock Photos

एक घंटे की आदत कम करती है डिप्रेशन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मेंटल हेल्थ की समस्याओं, डिप्रेशन के बढ़ते मामलों के लिए वैसे तो कई कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है, पर अगर हम सभी टीवी देखने या मोबाइल चलाते रहने के बजाय इसी समय को शारीरिक गतिविधियों-व्यायाम के लिए इस्तेमाल में लाना शुरू कर देते हैं तो इससे मिडलाइफ में डिप्रेशन का खतरा काफी कम हो सकता है।
 

  • यूरोपियन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कहा कि टीवी देखने की जगह सिर्फ एक घंटे दूसरी एक्टिविटीज जैसे खेल-कूद, व्यायाम, रनिंग यहां तक कि शरीर को आराम देने या फिर नींद लेने में ही लगा दिया जाए तो इससे आगे चलकर डिप्रेशन होने के खतरे को 40% तक कम किया जा सकता है।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिस गति से दुनियाभर में मेंटल हेल्थ की समस्या और डिप्रेशन के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में ये छोटा सा बदलाव आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।
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टीवी देखना कम करना आपके लिए जरूरी - फोटो : Adobe Stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दुनियाभर में 280 मिलियन (28 करोड़) से ज्यादा लोगों को डिप्रेशन है। इससे बचे रहने के लिए विशेषज्ञों ने बताया है कि सिर्फ एक घंटे टीवी देखने की जगह दूसरी एक्टिविटीज में यही समय लगाने से भी आपको काफी लाभ मिल सकता है।
 

  • टीवी या किसी अन्य प्रकार की स्क्रीन पर समय बिताने की जगह अगर सिर्फ आधे घंटे अगर खेल-कूद में लगा दिए जाएं तो इससे डिप्रेशन का खतरा 18% तक कम होता देखा गया है।
  • ज्यादा उम्र के लोगों में, इस आसान बदलाव से खतरा लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
  • टीवी या स्क्रीन देखने के बजाय अगर आप एक घंटे की अधिक नींद भी लेते हैं तो इससे भी डिप्रेशन के खतरे में कमी आ सकती है।
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मानसिक तनाव और डिप्रेशन का बढ़ता जोखिम - फोटो : Adobe Stock

टीवी या स्क्रीन टाइम कितना नुकसानदायक

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देना, आपके मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की सेहत को ठीक रखने में मददगार हो सकता है। गतिहीन जीवनशैली से मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, कैंसर और यहां तक कि असमय मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल में छोटा सा बदलाव करके आप इस तरह की कई समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के विशेषज्ञों ने कहा, यह सिर्फ एक जगह बैठे रहने के समय के बारे में नहीं है।
 

  • टीवी या स्क्रीन देखने जैसी दिमागी तौर पर पैसिव एक्टिविटीज से डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
  • ये आदत डोपामाइन के रेगुलेशन में गड़बड़ी, अनहेल्दी खान-पान और सोशल आइसोलेशन का कारण बनती है जिसका मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक असर होता है।
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तनाव, स्ट्रेस कम करने के लिए क्या करें? - फोटो : Freepik.com

मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए क्या करें?

शोधकर्ता कहते हैं, टीवी-मोबाइल देखने का हर अतिरिक्त घंटा डिप्रेशन के 5 प्रतिशत तक खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं,  लगातार उदासी रहना, किसी भी काम में मन न लगना, चिड़चिड़ापन, नींद या भूख में कमी, खुद को बेकार महसूस करना, थकान और फोकस की कमी डिप्रेशन के आम संकेत हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्तर पर इलाज और लाइफस्टाइल बदलाव से स्थिति को संभाला जा सकता है।

नियमित व्यायाम की आदत तनाव हार्मोन को कम करती है और मूड को बेहतर बनाती है। रोज 7-8 घंटे की नींद लेना दिमाग को रिकवर करने में मदद करती है। माइंडफुलनेस या मेडिटेशन अपनाना भी तनाव कम करता है और आपको डिप्रेशन से बचाने वाला हो सकता है।



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स्रोत
Effects of substituting TV-watching time with physical activities or sleep on incident major depression. Results from the lifelines cohort study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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