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बड़ा सवाल: कोविड से ठीक हो चुके लोगों को ओमिक्रॉन से कितना खतरा? जानिए क्या कहते हैं सीडीसी विशेषज्ञ

Mon, 06 Dec 2021 01:45 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Mon, 06 Dec 2021 01:45 PM IST
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reinfection of covid 19, omicron variant risk for covid recovered patients
कोरोना के दोबारा संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के सबसे खतरनाक माने जा रहे इस वैरिएंट के सोमवार तक देश में 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। जिस गति से ओमिक्रॉन के केस बढ़ रहे हैं, इससे स्वास्थ्य विभाग चिंतत है। विशेषज्ञ सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करने के साथ जल्द से जल्द टीके की दोनों डोज प्राप्त करने की सलाह देते हैं। इन सब के बीच लोगों के मन में लंबे समय से एक सवाल बना हुआ है कि क्या जो लोग पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, उनमें भी ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा हो सकता है?



अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि किसी भी वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में उससे अगली बार मुकाबले के लिए प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडीज निर्मित हो जाती हैं। ऐसे में सवाल है कि कोरोना की दूसरी लहर में जो लोग संक्रमित हो चुके हैं, क्या उन्हें ओमिक्रॉन वैरिएंट से खतरा है? आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।

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कोरोना का रि-इंफेक्शन - फोटो : iStock

क्या कहते हैं सीडीसी विशेषज्ञ?
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। अब तक के अध्ययनों के आधार पर सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों में भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित होने का जोखिम हो सकता है। संक्रमण के बाद शरीर में एक निश्चित मात्रा में प्राकृतिक प्रतिरक्षा का निर्माण होता है, जो कुछ महीनों में कम होने लगता है। जब तक इस वैरिएंट की प्रकृति के बारे में विस्तार से पता नहीं चल जाता है, सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

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कोरोना के जोखिम से रहें सुरक्षित (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

पुन: संक्रमण का हो सकता है जोखिम
सीडीसी के मुताबिक यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दूसरी लहर में लोगों को संक्रमण महीनों या एक साल पहले हुए थे, जिसका अर्थ है कि संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा समय के साथ कम हो सकती है, जिससे लोगों में पुन: संक्रमण का जोखिम हो सकता है। पहले के अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा 6 महीने या उससे अधिक समय तक रह सकती है। वहीं यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं ने एक अन्य अध्ययन में सुझाव दिया कि पूर्व में कोविड संक्रमण के बाद 10 महीने तक पुन: संक्रमण का जोखिम कम होता है।

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कोरोना के नए वैरिएंट्स से बचाव जरूरी - फोटो : iStock

क्या जिन्हें पहले गंभीर संक्रमण हुआ, वो ज्यादा सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को पहले कोविड का गंभीर संक्रमण हो चुका है, उनमें मेमोरी टी-सेल की मात्रा अधिक होती हैं। गंभीर कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने के लिए शरीर को अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप मेमोरी टी-सेल अधिक एक्टिव होती हैं। यह अगले संक्रमण से सुरक्षा देने में सहायक हैं, हालांकि ओमिक्रॉन में देखे गए म्यूटेशनों पर इसकी प्रतिक्रिया कैसी होती है, यह देखने वाली बात होगी।

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कोरोना वैक्सीन से मिलेगी सुरक्षा - फोटो : iStock

वैक्सीन की दोनों डोज बहुत आवश्यक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कहना है कि कोरोना के संक्रमण के जोखिम से बचे रहने के लिए सभी लोगों को सुरक्षात्मक उपायों का लगातार पालन करते रहना चाहिए। इसमें वैक्सीनेशन का बड़ा योगदान हो सकता है। टीके की दोनों डोज गंभीर संक्रमण और कोरोना से होने वाली मौत के जोखिम से आपको बचा सकती है। कई अध्ययनों में बूस्टर डोज देने पर भी जोर दिया जा रहा है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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