भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के सबसे खतरनाक माने जा रहे इस वैरिएंट के सोमवार तक देश में 20 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। जिस गति से ओमिक्रॉन के केस बढ़ रहे हैं, इससे स्वास्थ्य विभाग चिंतत है। विशेषज्ञ सभी लोगों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करने के साथ जल्द से जल्द टीके की दोनों डोज प्राप्त करने की सलाह देते हैं। इन सब के बीच लोगों के मन में लंबे समय से एक सवाल बना हुआ है कि क्या जो लोग पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, उनमें भी ओमिक्रॉन वैरिएंट का खतरा हो सकता है?
बड़ा सवाल: कोविड से ठीक हो चुके लोगों को ओमिक्रॉन से कितना खतरा? जानिए क्या कहते हैं सीडीसी विशेषज्ञ
क्या कहते हैं सीडीसी विशेषज्ञ?
कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। अब तक के अध्ययनों के आधार पर सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों का कहना है कि पहले कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों में भी ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित होने का जोखिम हो सकता है। संक्रमण के बाद शरीर में एक निश्चित मात्रा में प्राकृतिक प्रतिरक्षा का निर्माण होता है, जो कुछ महीनों में कम होने लगता है। जब तक इस वैरिएंट की प्रकृति के बारे में विस्तार से पता नहीं चल जाता है, सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।
पुन: संक्रमण का हो सकता है जोखिम
सीडीसी के मुताबिक यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि दूसरी लहर में लोगों को संक्रमण महीनों या एक साल पहले हुए थे, जिसका अर्थ है कि संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा समय के साथ कम हो सकती है, जिससे लोगों में पुन: संक्रमण का जोखिम हो सकता है। पहले के अध्ययनों में दावा किया जाता रहा है कि संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा 6 महीने या उससे अधिक समय तक रह सकती है। वहीं यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं ने एक अन्य अध्ययन में सुझाव दिया कि पूर्व में कोविड संक्रमण के बाद 10 महीने तक पुन: संक्रमण का जोखिम कम होता है।
क्या जिन्हें पहले गंभीर संक्रमण हुआ, वो ज्यादा सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को पहले कोविड का गंभीर संक्रमण हो चुका है, उनमें मेमोरी टी-सेल की मात्रा अधिक होती हैं। गंभीर कोरोनावायरस संक्रमण से निपटने के लिए शरीर को अधिक मेहनत की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप मेमोरी टी-सेल अधिक एक्टिव होती हैं। यह अगले संक्रमण से सुरक्षा देने में सहायक हैं, हालांकि ओमिक्रॉन में देखे गए म्यूटेशनों पर इसकी प्रतिक्रिया कैसी होती है, यह देखने वाली बात होगी।
वैक्सीन की दोनों डोज बहुत आवश्यक
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कहना है कि कोरोना के संक्रमण के जोखिम से बचे रहने के लिए सभी लोगों को सुरक्षात्मक उपायों का लगातार पालन करते रहना चाहिए। इसमें वैक्सीनेशन का बड़ा योगदान हो सकता है। टीके की दोनों डोज गंभीर संक्रमण और कोरोना से होने वाली मौत के जोखिम से आपको बचा सकती है। कई अध्ययनों में बूस्टर डोज देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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