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कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सुकून देने वाली है प्रतिरक्षा से संबंधित हालिया रिपोर्ट, जानें क्या है खास?
Tue, 16 Mar 2021 11:55 AM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Tue, 16 Mar 2021 11:55 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : iStock
देश में कोरोना के दोबारा से बढ़ रहे मामलों ने लोगों की चिंता एक बार फिर से बढ़ा दी है। हालांकि इस बीच जारी एक हालिया रिपोर्ट थोड़ी सुकून देने वाली है। ‘साइंस’ पत्रिका' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोविड-19 संक्रमण से स्वस्थ हो चुके लोगों में कई महीने से लेकर कुछ वर्षों तक कोरोनोवायरस के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा बनी रह सकती है। सरल भाषा में समझें तो रिपोर्ट का कहना है कि जो लोग पहले इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं वह अन्य लोगों के मुकाबले फिलहाल कोरोना वायरस से सुरक्षित माने जा सकते हैं। ‘साइंस’ पत्रिका' ने वायरस से संक्रमित रह चुके 188 मरीज़ों के रक्त के नमूनों की जांच के आधार पर यह रिपोर्ट पेश की है। यह रिपोर्ट इसलिए भी खास है क्योंकि जुलाई 2020 में प्रतिरक्षा से संबंधित अध्ययन में विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि रोग से ठीक होने के बाद शरीर में बनने वाली प्रतिरक्षा कुछ ही महीनों में ही नष्ट हो जाती है। इसका मतलब होता है कि व्यक्ति के दोबारा से संक्रमित होने का खतरा पैदा हो जाता है, इस लिहाजे से यह रिपोर्ट थोड़ी राहत देती है। आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या खास है?
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
हालिया अध्ययन से क्या पता चलता है?
प्रकाशित रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षणों की शुरुआत होने के बाद शरीर में बनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कम-से-कम आठ महीने तक सक्रिय रह सकती है। इस आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि संक्रमण से स्वस्थ हुए लगभग सभी व्यक्तियों का शरीर पुन: संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो जाता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि व्यक्ति के शरीर में संक्रमण से मुकाबले के लिए आवश्यक प्रतिरक्षा कोशिकाएँ पाई जाती हैं। इस अध्ययन के दौरान एक ही समय में एंटीबॉडी, स्मृति बी कोशिकाओं, सहायक टी कोशिकाओं और मारक टी कोशिकाओं को मापा गया। आइए प्रयुक्त इन चिकित्सकीय शब्दावलियों के बारे में जानते हैं।
प्रकाशित रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षणों की शुरुआत होने के बाद शरीर में बनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया कम-से-कम आठ महीने तक सक्रिय रह सकती है। इस आधार पर विशेषज्ञों ने बताया कि संक्रमण से स्वस्थ हुए लगभग सभी व्यक्तियों का शरीर पुन: संक्रमण से लड़ने में सक्षम हो जाता है, ऐसा इसलिए है क्योंकि व्यक्ति के शरीर में संक्रमण से मुकाबले के लिए आवश्यक प्रतिरक्षा कोशिकाएँ पाई जाती हैं। इस अध्ययन के दौरान एक ही समय में एंटीबॉडी, स्मृति बी कोशिकाओं, सहायक टी कोशिकाओं और मारक टी कोशिकाओं को मापा गया। आइए प्रयुक्त इन चिकित्सकीय शब्दावलियों के बारे में जानते हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
प्रतिरक्षा क्या होती है?
शरीर द्वारा रोगकारकों से स्वयं की रक्षा करने की क्षमता को प्रतिरक्षा यानी आम बोलचाल की भाषा में इम्यूनिटी के रूप में जाना जाता है। यह मुख्यरूप से दो प्रकार की होती है।
सहज प्रतिरक्षा और उपार्जित प्रतिरक्षा। सहज प्रतिरक्षा हमारे शरीर में जन्म के समय से ही मौजूद होती है जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा किसी प्रकार के रोग के संपर्क में आने के बाद शरीर इसका निर्माण करती है। दूसरी भाषा में इसे समझें तो शरीर जब पहली बार एक रोगजनक का सामना करता है तो रोगजनकों के संबंध में एक स्मृति बन जाती है जो अगली बार उसी रोगजनक से शरीर को होने वाले खतरे से सुरक्षित करती है।
शरीर द्वारा रोगकारकों से स्वयं की रक्षा करने की क्षमता को प्रतिरक्षा यानी आम बोलचाल की भाषा में इम्यूनिटी के रूप में जाना जाता है। यह मुख्यरूप से दो प्रकार की होती है।
सहज प्रतिरक्षा और उपार्जित प्रतिरक्षा। सहज प्रतिरक्षा हमारे शरीर में जन्म के समय से ही मौजूद होती है जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा किसी प्रकार के रोग के संपर्क में आने के बाद शरीर इसका निर्माण करती है। दूसरी भाषा में इसे समझें तो शरीर जब पहली बार एक रोगजनक का सामना करता है तो रोगजनकों के संबंध में एक स्मृति बन जाती है जो अगली बार उसी रोगजनक से शरीर को होने वाले खतरे से सुरक्षित करती है।
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रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट
- फोटो : ट्विटर
एंटीबॉडी
एंटीबॉडी एक प्रकार का प्रोटीन है जो प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा रोगजनक बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करने और उन्हे निष्क्रिय करने का काम करती है। इसे इम्युनोग्लोबुलिन के नाम से भी जाना जाता है। टी कोशिकाएँ और बी कोशिकाएँ अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के प्रमुख कोशिकीय घटक होती हैं। टी कोशिकाएँ कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा में शामिल होती हैं, जबकि बी कोशिकाएँ मुख्य रूप से त्रिदोषन प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज़िम्मेदार होती हैं।
एंटीबॉडी एक प्रकार का प्रोटीन है जो प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा रोगजनक बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करने और उन्हे निष्क्रिय करने का काम करती है। इसे इम्युनोग्लोबुलिन के नाम से भी जाना जाता है। टी कोशिकाएँ और बी कोशिकाएँ अनुकूली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के प्रमुख कोशिकीय घटक होती हैं। टी कोशिकाएँ कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा में शामिल होती हैं, जबकि बी कोशिकाएँ मुख्य रूप से त्रिदोषन प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज़िम्मेदार होती हैं।
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Blood Cells
मारक टी कोशिकाएं क्या होती हैं?
मारक टी कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार होती हैं। इनका कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह कोशिकाएं कैंसर या किसी प्रकार के संक्रमण से क्षतिग्रस्त होने वाली कोशिकाओं को मारती हैं।
मारक टी कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार होती हैं। इनका कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह कोशिकाएं कैंसर या किसी प्रकार के संक्रमण से क्षतिग्रस्त होने वाली कोशिकाओं को मारती हैं।