किसी का नाम या चीजों को रखकर भूल जाना काफी सामान्य समस्या है, हालांकि अगर ये अक्सर होने लगती है तो इस बारे में गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है। स्मृति हानि या असामान्य रूप से भूलने की समस्या, कुछ प्रकार की बीमारियों के कारण भी हो सकती है, जिनका समय पर निदान और इलाज किया जाना आवश्यक हो जाता है। आमतौर पर स्मृति हानि थोड़े समय के लिए हो सकती है और फिर ठीक हो जाती है। पर कुछ कारणों से इसके बढ़ने और गंभीर रूप लेने का भी जोखिम हो सकता है।
जानना जरूरी: अक्सर चीजों को भूलने की आदत से रहते हैं परेशान? इन वजहों से हो सकती है ये समस्या
क्या आपकी नींद होती है पूरी?
अक्सर चीजों को भूल जाने की समस्या, याद करने में होने वाली दिक्कतों की शुरुआत गड़बड़ लाइफस्टाइल के कारण शुरू होती है, जिसका प्रमुख कारण समय पर आपकी नींद पूरी न होना भी हो सकता है। अच्छी नींद, मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच के बाइंड को मजबूत करती है जो आपको लंबे समय तक चीजों को याद रखने में मदद करती है। वहीं, जब आपका दिमाग नींद की कमी के कारण भटक रहा होता है तो इसके लिए यादों को संग्रहित करना कठिन हो सकता है।
दवाओं का अधिक सेवन
याददाश्त की कमी या अक्सर चीजों को भूलने की समस्या का एक कारण कुछ प्रकार के दवाओं का सेवन करना भी हो सकता है। सामान्यतौर पर नींद की दवाएं आपकी याददाश्त को कमज़ोर कर देती हैं। इस प्रकार की दवाएं मस्तिष्क की उस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं जो आपको बेहतर नींद के लिए जरूरी होती है।
डायबिटीज रोगियों को हो सकती है ये दिक्कत
चीजों को अक्सर भूलने की समस्या उन लोगों में अधिक देखी जाती है जो डायबिटीज के शिकार होते हैं। उच्च रक्त शर्करा की स्थिति मस्तिष्क में छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। ये कोशिकाएं यादों को संग्रहित करने के लिए जरूरी होती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि दवा, व्यायाम और स्वस्थ आहार के साथ मधुमेह को कंट्रोल करके इस स्वास्थ्य जोखिम को कम किया जा सकता है।
धूम्रपान से हो सकती है मस्तिष्क को क्षति
धूम्रपान आपके मस्तिष्क के उन हिस्सों को सिकोड़ देता है जो आपको सोचने और चीजों को याद रखने में मदद करते हैं। यह आपके डिमेंशिया के खतरे को भी बढ़ाता है। ऐसे में यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इसके कारण भी सोचने की शक्ति पर प्रभावित हो सकती है। धूम्रपान से मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है और यह आपमें कई प्रकार के न्यूरोलॉजिकल विकारों के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।