कैंसर वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारी है, जिसका जोखिम साल-दर साल बढ़ता देखा जा रहा है। कैंसर का मृत्युदर भी अधिक है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कैंसर का मृत्यु अधिक होने का एक प्रमुख कारण समय पर इसका निदान और उपचार न हो पाना माना जाता है। देश में ज्यादातर लोगों में कैंसर का निदान आखिरी चरणों में हो पाता है, जहां से इलाज करना और रोगी की जान बचाना काफी कठिन हो जाता है।
Cancer Treatment: राष्ट्रपति ने लॉन्च की पहली स्वदेशी CAR T-Cell थेरेपी, कम लागत में हो सकेगा कैंसर का इलाज
मेड इन इंडिया थेरेपी से कैंसर का इलाज
India’s first CAR-T cell therapy is developed through collaboration between the Indian Institute of Technology, Bombay and Tata Memorial Hospital in association with industry partner ImmunoACT. So, we have two of India’s pioneering research institutes in their respective fields,… pic.twitter.com/pTj8kEx9Mw
NexCAR19 CAR T-सेल थेरेपी भारत की पहली 'मेड इन इंडिया' CAR T-सेल थेरेपी है, जिससे इलाज की लागत में काफी कमी आने की उम्मीद जताई गई है।
पिछले कुछ वर्षों में तकनीक विकास और एआई के चलते कैंसर के इलाज में बड़ी सफलता मिली है, हालांकि आम लोगों तक इसकी पहुंच अधिक लागत के कारण मुश्किल रही है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नई थेरेपी की मदद से कैंसर का इलाज आसान हो सकेगा।
90 प्रतिशत कम दाम में उपलब्ध होगी थेरेपी
थेरेपी के उद्घाटन के दौरान महामहिम ने कहा, हमारे पास अपने-अपने क्षेत्रों में भारत के दो अग्रणी अनुसंधान संस्थान हैं, जो मानवीय उद्देश्य के लिए उद्योग के साथ हाथ मिलाकर काम रहे हैं।
इस स्वदेशी थेरेपी के बारे में नई बात यह है कि इसकी लागत अन्य जगहों पर उपलब्ध थेरेपी की तुलना में 90 प्रतिशत कम है। यह दुनिया की सबसे सस्ती सीएआर-टी सेल थेरेपी है। इसके अलावा, यह 'मेक इन इंडिया' पहल का भी एक उदाहरण है जो आत्मनिर्भर भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमें उम्मीद है कि इस थेरेपी की मदद से आने वाले समय में कैंसर से मुकाबले के लिए देश को मजबूती मिलेगी।
सीएआर-टी सेल थेरेपी के बारे में जानिए
सीएआर-टी सेल थेरेपी या काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल थेरेपी इम्यूनोथेरेपी और जीन थेरेपी का एक रूप है। रोगी की प्रतिरक्षा कोशिकाओं, विशेष रूप से टी कोशिकाओं को संशोधित करने और उन्हें कैंसर से लड़ने के लिए तैयार करने के लिए जटिल आनुवंशिक इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है। सीएआर-टी सेल थेरेपी को चिकित्सा विज्ञान में सबसे अभूतपूर्व प्रगति में से एक माना जाता है। भारत ने इस दिशा में प्रगति करते हुए स्वदेशी थेरेपी को विकसित किया है।
प्रमुख कैंसर अस्पतालों में होगी उपलब्ध
कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा, मुझे बताया गया है कि यह थेरेपी देश भर के प्रमुख कैंसर अस्पतालों में उपलब्ध होगी, जिससे रोगियों और उनके परिवारों को नई आशा मिलेगी। इसके अलावा, यह किफायती उपचार दुनियाभर के सभी रोगियों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। यह हमारे "वसुधैव कुटुंबकम" के दृष्टिकोण के अनुरूप होगा। कैंसर से मुकाबले के लिए हमें एकजुटता और दृढ़ संकल्प की जरूरत है, हमें उम्मीद है कि इस तरह के नवाचार से हमारे लक्ष्य में मदद मिल सकेगी।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।