पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में होने वाली आम समस्याओं में से एक है। इस स्वास्थ्य विकार के कारण अंडाशय असामान्य मात्रा में एण्ड्रोजन हार्मोन का उत्पादन शुरू कर देता है। एण्ड्रोजन, मुख्यरूप से पुरुषों में सेक्स हार्मोन माना जाता है, आमतौर पर महिलाओं में ये कम मात्रा में मौजूद होता है।
Study: पीसीओएस की समस्या बढ़ा सकती है आत्महत्या के विचारों का जोखिम, करीब 13 फीसदी महिलाएं इसकी शिकार
पीसीओएस के कारण होने वाली समस्या
ताइवान के शोधकर्ताओं ने हालिया अध्ययन में अलर्ट किया है कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में आत्महत्या का प्रयास करने की आशंका अधिक होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रकार के जोखिमों को देखते हुए ऐसी महिलाओं को शारीरिक सेहत के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना और समस्या महसूस होने पर समय रहते मनोचिकित्सकों से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
पीसीओएस के कारण होने वाले कई शारीरिक परिवर्तन, मानसिक सेहत को नकारात्मक तौर पर प्रभावित करते हुए पाए गए हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
यूनाइटेड किंगडम में साल 2022 में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन महिलाओं में पीसीओएस का निदान हुआ उनमें समय के साथ आत्मघाती विचार आने, खुद को क्षति पहुंचाने, चिंतन और विचलित भावना की समस्या अधिक देखी गई।
इसी प्रकार से साल 2016 के स्वीडिश अध्ययन से पता चला है कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में, अन्य महिलाओं की तुलना में आत्महत्या का प्रयास करने की आशंका 40% अधिक थी। शोधकर्ताओं ने बताया कि पीसीओएस, चिंता और अवसाद के खतरे को बढ़ाने वाली समस्या है, जो सेल्फ-हार्म की भावना को बढ़ाती देखी गई है।
पीसीओएस और इसके कारण होने वाली दिक्कतें
पीसीओएस, दुनियाभर में प्रजनन आयु की 8 से 13 प्रतिशत महिलाओं में होने वाली समस्या है। इसे इनफर्टिलिटी का भी प्रमुख कारण माना जाता है। इस रोग की शिकार महिलाओं में मुंहासे होने, चेहरे या शरीर पर अतिरिक्त बाल आने, मोटापा, मासिक धर्म में समस्या होने का खतरा हो सकता है।
यह किस प्रकार से मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है इस बार में समझने के लिए अमर उजाला ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक और सुसाइड प्रिवेंशन को लेकर काम करने वाले डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से बात की। डॉ सत्यकांत बताते हैं, आत्महत्या की कोशिश करने वाली 50-60 फीसदी महिलाओं की मेडिकल हिस्ट्री में उनमें पीसीओएस की दिक्कतों के बारे में पता चलता है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, पीसीओएस के कारण होने वाली समस्याएं जैसे चेहरे पर अनचाहे बाल, बार-बार मुंहासे होना और मासिक धर्म की समस्याओं के साथ हार्मोनल असंतुलन की दिक्कत स्ट्रेस का प्रमुख कारण हो सकती है। तनाव की अनियंत्रित स्थिति अवसाद और आत्मघाती विचारों के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है। ओपीडी में आने वाली डिप्रेशन से ग्रसित महिलाओं में पीसीओएस की समस्या देखा जाना आम है।
इन कारणों की वजह से जरूरी है कि पीसीओएस की समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और अगर इसके लक्षण बिगड़ रहे हैं तो समय रहते चिकित्सक की सलाह लें। आमतौर पर शारीरिक स्वास्थ्य की समस्या मानी जाने वाली ये बीमारी गंभीर मनोरोगों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) and Non-Suicidal Self-Injury (NSSI)
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