भारत सहित दुनिया के कई देशों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण का कहर जारी है। देश में पिछले दो हफ्तों से कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। जनवरी के बाद से पहली बार दैनिक संक्रमण का मामला 10 हजार के आंकड़े को पार कर रहा है। कोरोना के बढ़ते केस ने एक बार फिर से विशेषज्ञों की चिंता काफी बढ़ा दी है।
Covid-19: भारत में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के कारण बढ़े केस हालांकि इस गंभीर खतरे का जोखिम कम, अध्ययन में बड़ा दावा
ओमिक्रॉन से लॉन्ग कोविड का जोखिम कम
डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से संक्रमण की स्थिति में लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने शोध किया। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों में लंबे समय तक बीमारी के दुष्प्रभावों के बने रहने का खतरा 20-50 प्रतिशत कम होता है। ऐसे में ओमिक्रॉन संक्रमितों में एक बड़े खतरे की आशंका को कम पाया गया है।
लॉन्ग कोविड से बचाने में वैक्सीन का योगदान
'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने जोई कोविड एप डेटा के विश्लेषण के आधार पर परिणाम प्राप्त किए। शोधकर्ताओं ने बताया कि लॉन्ग कोविड के जोखिम को कम करने के लिए वैक्सीनेशन को कारगर तरीका माना जा रहा है। किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने दिसंबर 2021 से इस साल मार्च के बीच 56,003 संक्रमितों के डेटा का अध्ययन किया। इस दौरान डेल्टा की तुलना में वैश्विक स्तर पर ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या अधिक थी।
अध्ययन में क्या पता चला?
यूके के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) के शोध के आधार पर पाया कि ओमिक्रॉन से संक्रमित रह चुके केवल पांच प्रतिशत लोगों ने संक्रमण के 12 से 16 सप्ताह बाद तक कम से कम एक लक्षण बने रहने की शिकायत की। वहीं डेल्टा से संक्रमित रह चुके लोगों में फेफड़े-हृदय से लेकर कमजोरी-थकान जैसी दिक्कतें संक्रमण से ठीक होने के एक साल बाद तक भी देखी जाती रही हैं।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण लंबे समय तक बीमारी के दुष्प्रभावों के बने रहने का खतरा कम है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ क्लेयर स्टीव्स ने कहते हैं, ओमिक्रॉन संक्रमितों में पिछले वैरिएंट की तुलना में लॉन्ग कोविड का जोखिम कम देखा जा रहा है, लेकिन फिर भी कुछ लोगों में ऐसी दिक्कत हो सकती है। इसमें से ज्यादातर वो लोग हैं जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ या फिर जिनको पहले से ही कोमारबिडिटी की शिकायत रह चुकी है। ऐसे कुछ लोगों में नींद की कमी और थकान जैसी दिक्कतें रिपोर्ट की गई हैं, इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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स्रोत और संदर्भ
Risk of long COVID associated with delta versus omicron variants of SARS-CoV-2
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