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Covid-19: भारत में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के कारण बढ़े केस हालांकि इस गंभीर खतरे का जोखिम कम, अध्ययन में बड़ा दावा

Fri, 17 Jun 2022 07:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 17 Jun 2022 07:25 PM IST
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Omicron variant is less likely to cause long COVID risk, new research in UK found
कोरोना वायरस का बढ़ता संकट - फोटो : iStock

भारत सहित दुनिया के कई देशों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण का कहर जारी है। देश में पिछले दो हफ्तों से कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। जनवरी के बाद से पहली बार दैनिक संक्रमण का मामला 10 हजार के आंकड़े को पार कर रहा है। कोरोना के बढ़ते केस ने एक बार फिर से विशेषज्ञों की चिंता काफी बढ़ा दी है।



रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में बढ़ते संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन के सब- वैरिएंट को  जिम्मेदार माना जा रहा है। अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट को काफी अधिक संक्रामकता वाला बताया जाता रहा है, हालांकि इसके कारण लोगों में अन्य वैरिएंट्स की तुलना में गंभीर रोग या वेंटिलेटर पर जाने का खतरा कम है। 

संक्रमण के साथ-साथ ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड का जोखिम भी विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आमतौर पर अब के डेटा में मुख्यरूप से दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमित रह चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के मामले देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में एक सवाल यह भी बना हुआ है कि हाल फिलहाल जो लोग ओमिक्रॉन की चपेट में आए हैं उनमें लॉन्ग कोविड होने का कितना खतरा हो सकता है? इस विषय पर किए गए एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है, आइए इस बारे में समझते हैं।

Omicron variant is less likely to cause long COVID risk, new research in UK found
ओमिक्रॉन और लॉन्ग कोविड - फोटो : iStock

ओमिक्रॉन से लॉन्ग कोविड का जोखिम कम

डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से संक्रमण की स्थिति में लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए ब्रिटेन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने शोध किया। किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों में लंबे समय तक बीमारी के दुष्प्रभावों के बने रहने का खतरा  20-50 प्रतिशत कम होता है। ऐसे में ओमिक्रॉन संक्रमितों में एक बड़े खतरे की आशंका को कम पाया गया है।

Omicron variant is less likely to cause long COVID risk, new research in UK found
वैक्सीनेशन ने कम कर दिया लॉन्ग कोविड का खतरा - फोटो : iStock

लॉन्ग कोविड से बचाने में वैक्सीन का योगदान

'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने जोई कोविड एप डेटा के विश्लेषण के आधार पर परिणाम प्राप्त किए। शोधकर्ताओं ने बताया कि लॉन्ग कोविड के जोखिम को कम करने के लिए वैक्सीनेशन को कारगर तरीका माना जा रहा है। किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने दिसंबर 2021 से इस साल मार्च के बीच 56,003 संक्रमितों के डेटा का अध्ययन किया। इस दौरान डेल्टा की तुलना में वैश्विक स्तर पर ओमिक्रॉन संक्रमितों की संख्या अधिक थी।

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Omicron variant is less likely to cause long COVID risk, new research in UK found
संक्रमण के बाद बनी रहने वाली दिक्कतें - फोटो : iStock

अध्ययन में क्या पता चला?

यूके के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) के शोध के आधार पर पाया कि ओमिक्रॉन से संक्रमित रह चुके केवल पांच प्रतिशत लोगों ने संक्रमण के 12 से 16 सप्ताह बाद तक कम से कम एक लक्षण बने रहने की शिकायत की। वहीं डेल्टा से संक्रमित रह चुके लोगों में फेफड़े-हृदय से लेकर कमजोरी-थकान जैसी दिक्कतें संक्रमण से ठीक होने के एक साल बाद तक भी देखी जाती रही हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण लंबे समय तक बीमारी के दुष्प्रभावों के बने रहने का खतरा कम है।

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Omicron variant is less likely to cause long COVID risk, new research in UK found
ओमिक्रॉन के खतरे के बारे में जानिए - फोटो : pixabay

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ क्लेयर स्टीव्स ने कहते हैं, ओमिक्रॉन संक्रमितों में पिछले वैरिएंट की तुलना में लॉन्ग कोविड का जोखिम कम देखा जा रहा है, लेकिन फिर भी कुछ लोगों में ऐसी दिक्कत हो सकती है। इसमें से ज्यादातर वो लोग हैं जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ या फिर जिनको पहले से ही कोमारबिडिटी की शिकायत रह चुकी है। ऐसे कुछ लोगों में नींद की कमी और थकान जैसी दिक्कतें रिपोर्ट की गई हैं, इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 


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स्रोत और संदर्भ

Risk of long COVID associated with delta versus omicron variants of SARS-CoV-2


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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