ऑस्टियोपोरोसिस, हड्डियों से संबंधित एक गंभीर समस्या है, जिसमें लोगों के लिए चलना और उठना तक काफी मुश्किल हो जाता है। यह समस्या मुख्यरूप से हड्डियों के घनत्व के कम होने पर होती है। इस स्थिति में हमारा शरीर हड्डियों के ऊतकों का उत्पादन कम कर देता है, जिसके कारण स्वाभाविक तौर पर हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। चूंकि इस स्थिति में हड्डियां पतली और भंगुर हो जाती हैं, जिसके कारण उनमें हल्के से ठोकर से भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
Osteoporosis: हल्के से ठोकर से भी हो सकता है फ्रैक्चर, जानिए क्यों होती है यह समस्या, कैसे करें बचाव?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑस्टियोपोरोसिस क्यों होता है?
ऑस्टियोपोरोसिस के कई कारक हो सकते हैं। कुछ स्थितियों में तो इससे बचाव करना भी संभव नहीं होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारा शरीर लगातार हड्डी के पुराने ऊतकों को अवशोषित करके नए ऊतकों को उत्पादित करता रहता है जिससे हड्डियों का घनत्व, ताकत और संरचनात्मक ठीक बनी रहती है। उम्र और जीवनशैली के कई कारक हड्डियों के नए ऊतकों के उत्पादन को प्रभावित कर देते हैं, जिसके कारण पुराने ऊतकों का अवशोषण तो होता रहता है पर नए ऊतकों का निर्माण नहीं हो पाता है, जिसके कारण इस तरह की समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम कारकों को समझिए
ऑस्टियोपोरोसिस, पुरुष और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन में अचानक कमी के कारण इसका जोखिम बढ़ जाता है। एस्ट्रोजन हार्मोन ही आमतौर पर महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या रह चुकी है, उनमें आनुवांशिक रूप से इस रोग का जोखिम बढ़ जाता है। आपकी लंबाई और आयु भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।
ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों की पहचान जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों की पहचान करके समय रहते अगर उपचार शुरू कर दिया जाए तो इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। हालांकि शुरुआती चरणों में कई लोगों में इसके कोई भी लक्षण या संकेत नहीं दिखाई देते हैं, जिसके कारण इसका पहचान कर पाना कठिन हो सकता है। ज्यादातर मामलों में इस समस्या का पता तब तक नहीं चल पाता है जब तक कि उन्हें फ्रैक्चर न हो जाए। हालांकि कुछ लक्षणों को लेकर लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए।
- पकड़ की ताकत कम होते जाना।
- नाखून का आसानी से टूटना।
- हल्के चोट से भी हड्डियों में दर्द अधिक होना।
ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव कैसे करें?
हड्डियों को स्वस्थ रखने के उपाय करके ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिमों को कम किया जा सकता है। इसके लिए आहार में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें। कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक है। हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले अन्य पोषक तत्वों में प्रोटीन, मैग्नीशियम, विटामिन-के और जिंक वाली चीजों को भी शामिल करें। आहार के साथ शारीरिक गतिविधियों और नियमित व्यायाम की आदत बनाएं।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।