वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना का संकट फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। कोरोना के ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण दुनियाभर में संक्रमण के मामलों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। भारत में भी यह वैरिएंट बड़ी समस्याओं का कारण बना हुआ है। तीसरी लहर का प्रमुख कारण माने जा रहे ओमिक्रॉन वैरिएंट के अब तक कई सब-वैरिएंट्स सामने आ चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर की संक्रामकता दर काफी अधिक बताई जा रही है।
Covid-19 Update: भारत में ओमिक्रॉन BA.4 और BA.5 से संक्रमण की पुष्टि, जानिए कितने चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं ये नए स्ट्रेन?
भारत में BA.4 और BA.5 की पुष्टि
ओमिक्रॉन के इन दो नए सब-वैरिएंट्स के मामलों की पुष्टि होने के साथ ही एहतियात के तौर पर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ा दी गई है। BA.4 और BA.5 के संक्रमण के बारे में INSACOG द्वारा दी गई जानकारियों के मुताबिक दोनों ही संक्रमितों में संक्रमण के हल्के लक्षण देखे गए हैं, दोनों का फुल वैक्सीनेशन हो चुका है।
दोनों मरीजों की कोई हाल-फिलहाल ट्रैवेल हिस्ट्री भी नहीं रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इन सब-वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोग या हास्पिटलाइजेशन की जरूरत कम देखी जा रही है।
ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट्स BA.4
भारत से पहले कोरोना के इन दो सब-वैरिएंट्स के मामले दक्षिण अफ्रीका और कुछ यूरोपीय देशों रिपोर्ट किए गए हैं। प्रारंभिक अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है या जिन तक उचित स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच नहीं है, उनमें इन वैरिएंट्स की संक्रामकता अधिक हो सकती है।
कोविड को लेकर डब्ल्यूएचओ के तकनीकी नेतृत्व, मारिया वान केरखोव ने एक रिपोर्ट में बताया कि बीए.4 संक्रमितों के करीब 16 देशों से लगभग 700 मामले दर्ज किए हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों में इस संक्रमण के लक्षण हल्के ही देखे जा रहे हैं।
ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट्स BA.5
ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BA.4 की ही तरह BA.5 भी कई देशों में लोगों को संक्रमण का शिकार बना चुका है। अब तक इस वैरिएंट के 17 देशों से लगभग 300 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के नए सब-वेरिएंट मूल ओमिक्रॉन स्ट्रेन की तुलना में अधिक गंभीर संक्रमण का कारण नहीं बनते हैं, हालांकि म्यूटेशन के साथ इनकी संक्रामक दर जरूर अधिक बनी हुई है।
सब-वैरिएंट्स के अध्ययन में क्या पता चला?
ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट्स को लेकर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिक इन नए वैरिएंट्स की संक्रामकता को लेकर चिंतित जरूर हैं पर इसके कारण गंभीर रोग के मामले देखने को ज्यादा नहीं मिले हैं।
यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक ओमिक्रॉन के मूल वैरिएंट की तुलना में वर्तमान में BA.4/BA.5 के कारण गंभीरता जैसे मामलों की आशंका कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के उभरते इन खतरों से बचाव के लिए सभी आयु समूहों के लिए बूस्टर डोज प्राप्त करना आवश्यक बना हुआ है। बूस्टर डोज, ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स से लोगों को अधिक सुरक्षित रखने में सहायक हो सकती है।