कोरोना महामारी ने जिस तरह दुनिया में तबाही मचाई है, उसे देखते हुए दुनियाभर के वैज्ञानिक सतर्क हो गए हैं और भविष्य में कोई महामारी न आए, इसको लेकर तमाम प्रयास और शोध किए जा रहे हैं। चूंकि कोविड-19 एक नया वायरस है, इसलिए इसे समझने में थोड़ा वक्त लगा, लेकिन निपाह वायरस का क्या? यह वायरस तो कई सालों से अस्तित्व में है और इसे जानलेवा और खतरनाक भी माना जाता है, तो क्या यह वायरस अगली महामारी की वजह बन सकता है? सबसे दिक्कत की बात ये है कि इसकी कोई वैक्सीन भी अब तक नहीं बन पाई है। आइए जानते हैं कि निपाह वायरस आखिर कितना खतरनाक है, यह फैलता कैसे है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
क्या निपाह वायरस ला सकता है अगली महामारी? अब तक नहीं बनी है इसकी कोई वैक्सीन
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कब हुई थी निपाह वायरस की खोज?
- अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, निपाह वायरस (NiV) की खोज पहली बार साल 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सूअर और लोगों में संक्रमण फैलने के बाद हुई थी। हालांकि इन दोनों ही जगहों पर 1999 के बाद से इसका कोई नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन इस वायरस से संक्रमण के मामले भारत समेत कई अन्य देशों में भी देखने को मिले हैं। कुछ साल पहले केरल में इस वायरस की वजह से कई लोगों की मौत हो गई थी।
कितना खतरनाक है निपाह वायरस?
- इंसानों में निपाह वायरस के संक्रमण से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस वायरस से संक्रमित लोगों में से 40-75 फीसदी तक की मौत हो जाती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण कहां फैला है। जब इस वायरस का संक्रमण पहली बार फैला था, तब 250 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आए थे और इनमें से करीब 40 फीसदी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को गंभीर नर्वस बीमारी हुई थी और उनकी मौत हो गई थी। अब आप समझ सकते हैं कि यह वायरस कितना खतरनाक है।
निपाह वायरस फैलता कैसे है?
यह वायरस इंसानों में इन तरीकों से फैल सकता है:
- संक्रमित जानवरों (जैसे सूअर या चमगादड़) के सीधे संपर्क में आने से या उनके शरीर के तरल पदार्थ (जैसे- रक्त, मूत्र या लार) से
- संक्रमित जानवरों के शरीर के तरल पदार्थों द्वारा दूषित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से (जैसे- ताड़ का रस पीने से या संक्रमित चमगादड़ द्वारा दूषित फल खाने से)
- निपाह वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति या उसके शरीर के तरल पदार्थ (जैसे- नाक या श्वसन की बूंदों, पेशाब या खून) के संपर्क में आने से
निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं?
- सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक निपाह वायरस का संक्रमण इंसेफ्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग को नुकसान पहुंचता है।
- इसके संक्रमण के शुरुआती दौर में सांस लेने में दिक्कत होती है जबकि आधे मरीजों में न्यूरोलॉजिकल यानी तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी होती हैं।
- इसके संक्रमण से दिमाग में सूजन होने लगता है।
- तेज बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, खांसी और मांसपेशियों में दर्द की समस्या भी होती है।
- लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के बाद 4-14 दिनों में दिखाई देते हैं।
- इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तीन से 14 दिन तक तेज बुखार और सिरदर्द की वजह बन सकता है।
- यह इतना खतरनाक है कि महज 24-48 घंटों में ही संक्रमित व्यक्ति को कोमा में पहुंचा सकता है।