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Breast Cancer: स्तन कैंसर मरीजों के लिए व्रत रखना हो सकता है फायदेमंद, नए शोध में हुआ बड़ा खुलासा

Sat, 13 Dec 2025 04:45 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Sat, 13 Dec 2025 04:45 PM IST
सार

Fasting Benefits Breast Cancer: स्तन कैंसर एक बेहद गंभीर बीमारी है, जिसके इलाज में जब दवाएं दी जाती हैं तो कई बार वो काम नहीं करती हैं। एक नए शोध में इसी से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि व्रत रखने से मरीजों में सकारात्मक बदलाव दिख सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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New Research Finds Positive Impact of Fasting for Breast Cancer Patients Health Study Report
स्तन कैंसर - फोटो : Amar Ujala

Breast Cancer Research Fasting: स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। दुनिया भर में महिलाओं में एस्ट्रोजन-आधारित ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम प्रकार है, जिसके इलाज के लिए डॉक्टर आमतौर पर 'एंडोक्राइन थेरेपी' (जैसे टेमोक्सीफेन दवा) का उपयोग करते हैं। ये दवाएं एस्ट्रोजन को रोककर कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ को धीमा करती हैं।



हालांकि समस्या तब उत्पन्न होती है जब लंबे समय के उपचार के बाद ट्यूमर इन दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट हो जाता है और कैंसर फिर से बढ़ने लगता है। इस गंभीर चुनौती का सामना करने के लिए हाल ही में हुए एक स्टडी ने हैरान कर देने वाला समाधान खोजा है और वो है नियंत्रित उपवास। शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग में पाया कि जब टैमोक्सीफेन के साथ-साथ हफ्ते में 48 घंटे का उपवास कराया गया, तो ट्यूमर खत्म होने की रफ्तार सिर्फ दवा लेने के मुकाबले कहीं ज्यादा थी।

उन्होंने पाया है कि अगर एंडोक्राइन थेरेपी के साथ मरीज नियंत्रित तरीके से उपवास करे, तो कैंसर सेल्स दवा के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे ट्यूमर तेजी से ठीक हो सकता है। यह खोज भविष्य में लाखों मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है, जिन पर कैंसर की पुरानी दवाइयों ने असर करना बंद कर दिया है।

New Research Finds Positive Impact of Fasting for Breast Cancer Patients Health Study Report
ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com

कैसे काम करता है उपवास का कैंसर-रोधी प्रभाव?
उपवास का असर सीधे शरीर के हार्मोनल स्तर पर होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार जब शरीर भूखा रहता है, तो कोर्टिसोल और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कोर्टिसोल कैंसर कोशिकाओं के अंदर एक महत्त्वपूर्ण 'रिसेप्टर' को सक्रिय करता है, जिसे 'ग्लूकोकोर्टिकॉइड रिसेप्टर' कहते हैं। यह रिसेप्टर ट्यूमर की ग्रोथ को रोकने वाले जीन्स को 'ऑन' कर देता है और कैंसर बढ़ाने वाले प्रोटीन्स को ब्लॉक कर देता है।


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New Research Finds Positive Impact of Fasting for Breast Cancer Patients Health Study Report
ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com

उपवास ने कैंसर सेल्स को बनाया संवेदनशील
इस हार्मोनल बदलाव के कारण, उपवास कैंसर कोशिकाओं की रक्षात्मक दीवार को कमजोर कर देता है। कमजोर हुई कैंसर कोशिकाएं एंडोक्राइन थेरेपी की दवाओं के प्रति फिर से संवेदनशील हो जाती हैं। यानी उपवास एक तरह से दवा के प्रभाव को पुनः सक्रिय करता है। यह कॉम्बिनेशन उपचार उन प्रतिरोधी ट्यूमर पर भी प्रभावी परिणाम दिखाता है, जिन पर केवल दवा का असर नहीं हो रहा था।


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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com

भूखा नहीं रह सकते? दवा है विकल्प
वैज्ञानिकों ने यह भी ध्यान में रखा कि हर मरीज के लिए लंबे समय तक भूखा रहना संभव नहीं है, खासकर उपचार के दौरान। इसलिए, उन्होंने पाया कि 'डेक्सामेथासोन' नामक एक सामान्य स्टेरॉयड दवा देने पर भी शरीर में बिल्कुल वैसा ही असर होता है, जैसा उपवास करने पर होता है। यह दवा कैंसर सेल्स को उसी तरह कमजोर करती है, जिससे एंडोक्राइन थेरेपी की दवाएं फिर से असरदार हो जाती हैं।

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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com
भविष्य की चिकित्सा में बदलाव
यह नई खोज स्तन कैंसर के इलाज की दिशा में एक बड़ा मोड़ ला सकती है। अब डॉक्टर उन ब्रेस्ट कैंसर मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजनाएं बना सकते हैं जो एंडोक्राइन थेरेपी के प्रति रेसिस्टेंट हो चुके हैं। इस विधि में या तो नियंत्रित उपवास या डेक्सामेथासोन दवा का उपयोग करके कैंसर की दवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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