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Covid-19: दक्षिण अफ्रीका में देखा गया कोरोना का एक और नया वैरिएंट, जानिए यह अब तक के वैरिएंट्स से कितना अलग?

Sat, 17 Sep 2022 03:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 17 Sep 2022 03:38 PM IST
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new omicron ba.2.75 symptoms and severity, new covid variant risk factors
कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : Pixabay

भारत सहित दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण का खतरा बरकरार है। इस बीच हालिया रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन के एक और नए सब-वैरिएंट का पता लगाया है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग ने ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट BA.2.75 की पुष्टि की है, हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान में इसके केस बहुत कम हैं। स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता फोस्टर मोहले ने बताया कि इस सब-वैरिएंट का पहली बार जुलाई में गौतेंग में एक सैंपल टेस्ट में पता चला था, हालांकि उसके बाद से यह नहीं देखा गया था। इस बीच हाल में कुछ नए सैंपल में इसकी पुष्टि की गई है।



अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल न तो इसे 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' माना गया है न ही 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न'। दक्षिण अफ्रीका में ओमिक्रॉन का BA.4 और BA.5 वैरिएंट प्रमुख चिंता का कारण बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी नए वैरिएंट की प्रकृति को समझा नहीं जा सका है, इस बारे में अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि जिस प्रकार से नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं ऐसे में यह जरूर कहा जा सकता है कि संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है, लोगों को विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। आइए सामने आए ओमिक्रॉन के इस नए वैरिएंट के बारे में जानते हैं।

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ओमिक्रॉन BA.2.75 वैरिएंट का जोखिम - फोटो : iStock

BA.2.75 कितना खतरनाक?

ऑस्ट्रिया के वियना स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोटेक्नोलॉजी में रिसर्च ग्रुप लीडर डॉ. उलरिच एलिंग कहते हैं यह उभरता हुआ सब-वैरिएंट इतना नया है कि इसके अब तक सिर्फ 400 जीनोमिक सीक्वेंस ही उपलब्ध  हैं। पहले से ही विशेषज्ञों ने इस बात पर ध्यान आकर्षित किया था कि BA.2.75 में नौ म्यूटेशन्स हैं, उनमें से आठ स्पाइक प्रोटीन के लिए जीनोम कोडिंग के क्षेत्र में नए हैं।

डॉ एलिंग ने चेताया है कि BA.2 के उत्परिवर्तन इन वैरिएंट्स को आसानी से प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने में सहायता कर रहे हैं, फिलहाल यह बड़े चिंता का कारण है। इस स्थिति में जिन लोगों को टीकाकरण हो चुका है उन्हें भी संक्रमण से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। 

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ओमिक्रॉन BA.2.75 से संक्रमण का जोखिम - फोटो : Pixabay

BA.2.75 को लेकर क्या कहते हैं अध्ययन?

वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए फिलहाल अध्ययन किए जा रहे हैं। अब तक की ज्ञात जानकारियों के मुताबिक ओमिक्रॉन के अन्य सब वैरिएंट्स की तरह यह नया वैरिएंट भी प्रतिरक्षा रोधी हो सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि BA.2.75 में भी ACE2 रिसेप्टर्स के प्रति बॉन्डिंग देखी जा रही है। ACE2, मानव ऊतकों में पाया जाने वाला रिसेप्टर है जिसे SARS-CoV-2 वायरस कोशिकाओं में प्रवेश करने और तेजी से खुद को बढ़ाने के लिए उपयोग करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल इस नए खतरे को विस्तार से समझने के लिए और अधिक अध्ययन किए जा रहे हैं।

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कोरोना वैक्सीनेशन से मिल सकती है सुरक्षा - फोटो : Istock

वैक्सीनेशन से मिल सकती है सुरक्षा

द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार दुनियाभर में फिलहाल जो भी टीके मौजूद हैं उनको प्रयोग में लाकर BA.2.75 और अन्य सब-वैरिएंट्स के कारण होने वाले गंभीर रोग के खतरे को कम किया जा सकता है।

करोलिंस्का इंस्टिट्यूट में माइक्रोबायोलॉजी में प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डॉ  बेंजामिन मुरेल कहते हैं, हमारे अध्ययन से पता चलता है कि ओमिक्रॉन BA.2.75 के ज्यादातर लक्षण BA.5 से मिलते जुलते ही देखे जा रहे हैं। अभी फिलहाल यह कह पाना कठिन है कि यह वैरिएंट कितनी गंभीर और किस प्रकार के संक्रमण का कारण बन सकता है?

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कोरोना से होने वाले खतरे - फोटो : Pixabay

कई देशों में  BA.4.6 के मामले बढ़े

एक अन्य रिपोर्ट में यूनाइटेड किंगडम हेल्थ सेक्युरिटी एजेंसी (UKHSA) ने कुछ हिस्सों में BA.4.6 नामक नए सब-वैरिएंट के बढ़ने के बारे मे सूचित किया है। यूके और यूएस के कई हिस्सों से इस नए सब-वैरिएंट की पहचान की जा चुकी है। 5 सितंबर तक, BA.4.6 के बढ़ने की दर 36 प्रतिशत के करीब बताई जा रही थी।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, BA.4.6  पूरे अमेरिका में हाल के मामलों के 9% से अधिक कोविड-19 मामलों के लिए जिम्मेदार है। फिलहाल इससे संक्रमितों में हल्के लक्षण ही देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने सभी से कोरोना के इस नए खतरे को लेकर बचाव करते रहने की अपील की है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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