दुनियाभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच इसकी काट ढूंढने के लिए विभिन्न देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। इस बीच कई तरह की नई दवाएं भी सामने आई हैं, जबकि पहले से उपलब्ध दवाओं के जरिए भी कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण गंभीर होने की स्थिति में सांस की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है और मौत का खतरा रहता है। वैज्ञानिक इसकी ज्यादा से ज्यादा कोशिश कर रहे हैं कि किन तरीकों से कोरोना वायरस का जोखिम कम किया जा सकता है। यानी किस तरह कोरोना का संक्रमण गंभीर होने से रोका जा सकता है। इस बीच इस्रायल के येरूशलम में हिब्रू विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता ने दावा किया है कि बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा ‘फेनोफाइब्रेट’ कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम करने में कारगर है।
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Coronavirus Drug: कोरोना से लड़ने में कारगर है कोलेस्ट्रॉल की ये दवा, जानें वायरस को कैसे खत्म कर देती है
Wed, 15 Jul 2020 11:09 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Wed, 15 Jul 2020 11:09 AM IST
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Coronavirus Drug Update
- फोटो : Pixabay/Amar Ujala
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
- शोधकर्ता का दावा है कि यह दवा कोविड 19 के स्तर को सामान्य जुकाम के स्तर तक कर देने में मदद करती है। संक्रमित मानव कोशिका पर दवा के इस्तेमाल और पर्यवेक्षण के बाद यह दावा किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि क्लीनिकल ट्रायल में भी इस बात की पुष्टि होती है कि इस दवा से उपचार के बाद कोरोना की स्थिति सामान्य जुकाम जैसी हो जाएगी।
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- विश्वविद्यालय के ग्रास सेंटर ऑफ बायोइंजीनियरिंग में निदेशक प्रोफेसर याकोव नाहमियास ने न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई मेडिकल सेंटर में बेंजामिन टेनोएवर के साथ संयुक्त शोध में पाया कि नोवेल कोरोना वायरस इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसके कारण फेफड़ों में वसा का जमाव हो जाता है, जिसे दूर करने में फेनोफाइब्रेट मददगार है।
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- फोटो : Pixabay
- विश्वविद्यालय के प्रो. नाहमियास ने कहा
हम जिस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं यदि उसकी पुष्टि नैदानिक शोधों में भी होती है तो इस उपचार से कोविड-19 का जोखिम कम हो जाएगा और यह सामान्य जुकाम की तरह हो जाएगा।
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- फोटो : Pixabay
- दोनों शोधकर्ताओं ने देखा कि Sars Cov-2 स्वयं को बढ़ाने के लिए मरीजों के फेफड़ों में किस तरह से बदलाव करता है। उन्होंने पाया कि कोरोना वायरस कार्बोहाइड्रेट को जलने से रोकता है, जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों की कोशिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है। यही परिस्थिति वायरस के बढ़ने के लिए अनुकूल होती है। शोधकर्ताओं ने कहा, यही वजह है कि मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों के कोविड-19 की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है।