मानसून की शुरुआत होते ही मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। मलेरिया-डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां इन दिनों में काफी आम हैं। हालांकि इस साल बरसात की शुरुआत होने से पहले ही महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में डेंगू संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष की शुरुआत से मई के पहले सप्ताह तक 1,755 डेंगू-पॉजिटिव मामलों की सूचना दी थी। अब चूंकि मानसून की शुरुआत हो गई है ऐसे में डेंगू का खतरा और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Dengue: डेंगू के कारण न्यूरोलॉजिकल विकारों और कोमा का भी खतरा, डॉक्टर से जानिए कितना खतरनाक है ये संक्रमण
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डेंगू बुखार और इसके लक्षण
डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छरों द्वारा फैलने वाली बीमारी है। डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर दिन के समय में ज्यादा काटते हैं। डेंगू की बीमारी में अक्सर संक्रमण के 3 से 14 दिनों के भीतर लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इसमें तेज बुखार के साथ शरीर-जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर दाने और चकत्ते होने जैसे लक्षण होते हैं। कुछ लोगों में ये आंतरिक रक्तस्राव का कारण भी बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू के गंभीर रोग पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर समय पर इसका उपचार न हो पाए तो इससे कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है।
तंत्रिका संबंधी समस्याओं का खतरा
डेंगू किस प्रकार से शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसे समझने के लिए किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि डेंगू की बीमारी और इससे ठीक होने के दौरान कुछ लोगों को तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। डेंगू से पीड़ित लोगों को सिरदर्द, मानसिक स्थिति में बदलाव, दौरे पड़ने और गंभीर स्थितियों में कोमा तक का भी खतरा रहता है।
अध्ययनों से पता चलता है कि डेंगू वायरस की न्यूरोट्रॉपिक प्रकृति होती है जिसका मतलब है कि यह सीधे तंत्रिका कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है, जिससे उनमें क्षति और इंफ्लामेशन हो सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर जयंत सिंह बताते हैं, डेंगू की स्थिति में ब्लड प्लेटलेट काउंट कम होना सबसे आम है। प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर 10,000 से कम होने की स्थिति में गंभीर आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। दुर्लभ मामलों में इसके कारण गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का जोखिम रहता है जो मस्तिष्क में रक्तस्राव का कारण बन सकती है, इसे घातक माना जाता है।
डेंगू के कारण इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) जैसे रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बन सकती है।
मच्छरों के काटने से बचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू कई मामलों में गंभीर बीमारी है। कुछ रोगियों में इसके कारण स्ट्रोक होने का भी खतरा रहता है। इस तरह की स्वास्थ्य स्थितियों से बचे रहने के लिए जरूरी है कि मच्छरों के काटने से बचा जाए। डेंगू का संक्रमण शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली माना जाता है।
मानसून के दिनों में मच्छरों से बचाव को लेकर सावधान रहें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छरों को पनपने से रोकें, दवा का छिड़काव कराएं और साथ ही साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उपाय करते रहना भी बहुत आवश्यक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।