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Dengue: डेंगू के कारण न्यूरोलॉजिकल विकारों और कोमा का भी खतरा, डॉक्टर से जानिए कितना खतरनाक है ये संक्रमण

Thu, 11 Jul 2024 04:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 11 Jul 2024 04:32 PM IST
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Neurological Complications of Dengue Fever know How dengue affects brain
डेंगू के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock

मानसून की शुरुआत होते ही मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। मलेरिया-डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां इन दिनों में काफी आम हैं। हालांकि इस साल बरसात की शुरुआत होने से पहले ही महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में डेंगू संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष की शुरुआत से मई के पहले सप्ताह तक 1,755 डेंगू-पॉजिटिव मामलों की सूचना दी थी। अब चूंकि मानसून की शुरुआत हो गई है ऐसे में डेंगू का खतरा और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।



दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक फिलहाल यहां डेंगू के रोगी ज्यादा नहीं हैं हालांकि खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने अभी से ही एहतियातन सभी लोगों को मच्छरों से बचाव के लिए उपाय करते रहने की सलाह दी है।

डेंगू के गंभीर मामले रक्तस्रावी विकारों को बढ़ाने वाले और जानलेवा भी हो सकते हैं जिसको लेकर चिकित्सक बार-बार सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। क्या डेंगू के कारण न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य समस्याओं का भी खतरा हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com

डेंगू बुखार और इसके लक्षण

डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छरों द्वारा फैलने वाली बीमारी है। डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर दिन के समय में ज्यादा काटते हैं। डेंगू की बीमारी में अक्सर संक्रमण के 3 से 14 दिनों के भीतर लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इसमें तेज बुखार के साथ शरीर-जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर दाने और चकत्ते होने जैसे लक्षण होते हैं। कुछ लोगों में ये आंतरिक रक्तस्राव का कारण भी बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डेंगू के गंभीर रोग पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर समय पर इसका उपचार न हो पाए तो इससे कई प्रकार की न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है।

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तंत्रिका संबंधी समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock

तंत्रिका संबंधी समस्याओं का खतरा

डेंगू किस प्रकार से शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसे समझने के लिए किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि डेंगू की बीमारी और इससे ठीक होने के दौरान कुछ लोगों को तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। डेंगू से पीड़ित लोगों को सिरदर्द, मानसिक स्थिति में बदलाव, दौरे पड़ने और गंभीर स्थितियों में कोमा तक का भी खतरा रहता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि डेंगू वायरस की न्यूरोट्रॉपिक प्रकृति होती है जिसका मतलब है कि यह सीधे तंत्रिका कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है, जिससे उनमें क्षति और इंफ्लामेशन हो सकती है।

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डेंगू में होने वाली समस्याएं - फोटो : istock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर जयंत सिंह बताते हैं, डेंगू की स्थिति में ब्लड प्लेटलेट काउंट कम होना सबसे आम है। प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर 10,000 से कम होने की स्थिति में गंभीर आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। दुर्लभ मामलों में इसके कारण गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का जोखिम रहता है जो मस्तिष्क में रक्तस्राव का कारण बन सकती है, इसे घातक माना जाता है।

डेंगू के कारण इंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क ज्वर) जैसे रोगों का भी खतरा बढ़ जाता है जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बन सकती है।

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डेंगू बुखार और इसके जोखिम - फोटो : Freepik

मच्छरों के काटने से बचें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू कई मामलों में गंभीर बीमारी है। कुछ रोगियों में इसके कारण स्ट्रोक होने का भी खतरा रहता है। इस तरह की स्वास्थ्य स्थितियों से बचे रहने के लिए जरूरी है कि मच्छरों के काटने से बचा जाए। डेंगू का संक्रमण शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली माना जाता है।

मानसून के दिनों में मच्छरों से बचाव को लेकर सावधान रहें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, मच्छरों को पनपने से रोकें, दवा का छिड़काव कराएं और साथ ही साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उपाय करते रहना भी बहुत आवश्यक है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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