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डेंगू का सीजन: डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? जानें 5 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

Wed, 30 Sep 2026 10:48 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shruti Gaur Updated Wed, 30 Sep 2026 10:48 AM IST
सार

Role of Platelets in Dengue Recovery: जब किसी को डेंगू होता है तो डॉक्टरों का पूरा ध्यान प्लेटलेट्स पर ही होता है। इसी के चलते इससे जुड़ी अफवाहें हैं जिनपर लोग आंख बंद करके भरोसा करते हैं। आइए जानते हैं इन्हीं की सच्चाई...

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myths and facts about platelets while suffering from dengue in hindi
डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? - फोटो : AI
Role of Platelets in Dengue Recovery: डेंगू का नाम सुनते ही सबसे पहले लोगों के मन में प्लेटलेट्स का ख्याल आता है। अक्सर मरीज या उनके परिजन प्लेटलेट काउंट कम होते ही घबरा जाते हैं और इसे डेंगू की गंभीरता से जोड़ने लगते हैं। इसी वजह से डेंगू और प्लेटलेट्स को लेकर कई तरह की बातें सोशल मीडिया और लोगों के बीच प्रचलित हैं। लेकिन हर कम प्लेटलेट काउंट का मतलब यह नहीं होता कि मरीज को तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत है।


 डेंगू में बीमारी की गंभीरता का आकलन केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर नहीं किया जाता, बल्कि मरीज की पूरी स्थिति, ब्लीडिंग, ब्लड प्रेशर, हेमाटोक्रिट और अन्य संकेतों को भी देखा जाता है। वहीं, प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले कुछ घरेलू नुस्खों को लेकर भी कई दावे किए जाते हैं, जिनके पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हो सकते। ऐसे में जरूरी है कि डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स से जुड़ी सही जानकारी को समझा जाए और अफवाहों से बचा जाए।
 
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डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? - फोटो : Amarujala.com/AI
डेंगू में प्लेटलेट्स की भूमिका क्या है?

 प्लेटलेट्स यानी रक्त के छोटे-छोटे घटक खून का थक्का बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डेंगू संक्रमण के दौरान कई मरीजों में प्लेटलेट काउंट कम हो सकता है। इसे थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और कई अन्य जांचों को ध्यान में रखकर उपचार तय करते हैं।

 
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डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? - फोटो : Freepik.com
प्लेटलेट्स को लेकर कौन-सी बातें सही और कौन-सी गलत?

 मिथक 1: प्लेटलेट्स कम होते ही प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी है

 यह जरूरी नहीं है। प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन का फैसला केवल काउंट के आधार पर नहीं किया जाता। सक्रिय रक्तस्राव और मरीज की क्लिनिकल स्थिति जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।

  मिथक 2: प्लेटलेट्स कम होना मतलब मरीज की हालत गंभीर है

 हर मामले में ऐसा नहीं होता। डेंगू में प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं और फिर बीमारी से रिकवरी के साथ धीरे-धीरे बढ़ भी सकते हैं। गंभीरता का आकलन डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर करते हैं।

मिथक 3: प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कोई एक खास फल या जूस जरूरी है

 डेंगू में संतुलित आहार और पर्याप्त तरल पदार्थ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को प्लेटलेट्स बढ़ाने का निश्चित इलाज मानना सही नहीं है। पपीते के पत्ते के रस जैसे घरेलू उपायों को लेकर भी कई दावे हैं, लेकिन इन्हें डॉक्टर की सलाह और उचित चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

 
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डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? - फोटो : Freepik.com
मिथक 4: प्लेटलेट्स गिर रहे हैं तो तुरंत घबराने की जरूरत है

 प्लेटलेट काउंट में गिरावट डेंगू में देखी जा सकती है। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मरीज में ब्लीडिंग, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी या अन्य चेतावनी संकेत तो नहीं हैं।

मिथक 5: प्लेटलेट्स बढ़ने लगें तो मरीज पूरी तरह ठीक हो गया

 प्लेटलेट्स का बढ़ना रिकवरी का एक संकेत हो सकता है, लेकिन मरीज की पूरी स्थिति का मूल्यांकन जरूरी है। डॉक्टर की निगरानी और सलाह के अनुसार जांच एवं देखभाल जारी रखनी चाहिए।

 
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डेंगू में प्लेटलेट्स को लेकर ये बातें कितनी सच? - फोटो : AI
डेंगू में किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें?

 डेंगू के दौरान कुछ चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। इनमें तेज या लगातार पेट दर्द, बार-बार उल्टी, मसूड़ों या नाक से खून आना, खून की उल्टी या मल में खून, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और शरीर में पानी की कमी जैसे संकेत शामिल हो सकते हैं।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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