दुनिया के कई देशों में मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। अफ्रीकी देशों विशेषकर कांगों में संक्रमण के खतरनाक तरीके से बढ़ने के बाद अब ये दूसरे देशों को भी चपेट में लेता दिख रहा है। मंकीपॉक्स के संक्रमण की रफ्तार और रोग की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान-स्वीडन में भी इस संक्रामक रोग के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को इस बढ़ते खतरे को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।
Monkeypox: मंकीपॉक्स को लेकर भारत में भी अलर्ट जारी, सात प्वाइंट्स जानिए कितना खतरनाक है एमपॉक्स
अधिकारियों के लिए जारी किए गए निर्देश
सभी जिला स्वास्थ्य अधिकारियों (डीएचओ), चेन्नई, मदुरै और कोयंबटूर के हवाई अड्डों और बंदरगाह के स्वास्थ्य अधिकारियों को जारी परिपत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक टी.एस. सेल्वाविनायगम ने एमपॉक्स के जोखिमों को लेकर अलर्ट किया है। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग करने और पिछले 21 दिनों के यात्रा की जानकारी लेने के निर्देश जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि साल 2022 में पहली बार भारत में संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए थे। 2022 से अब तक देश में वायरल संक्रमण के 30 मामले दर्ज किए गए हैं।
भारत में कितना खतरा?
वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल भारत में मंकीपॉक्स संक्रमण का जोखिम बहुत कम है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। चूंकि ये काफी संक्रामक वायरस है और पड़ोसी देशों में पहुंच गया है ऐसे में पहले से अलर्ट हो जाना जरूरी है।
खबरों के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा जल्द ही राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अधिकारियों के साथ बैठक करके स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।
आइए सात प्वाइंट्स में मंकीपॉक्स के बारे में विस्तार से समझते हैं।
1. एमपॉक्स कई दशकों से अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रहा है। इंसानों में पहला मामला साल 1970 में कांगो में रिपोर्ट किया गया। फिलहाल कांगो में वर्तमान में संक्रमण के 27,000 मामले सामने आए हैं। जनवरी 2023 से अब तक यहां 1,100 से ज्यादा मौतें हुई हैं।
2. यूएस-अफ्रीका सहित कई देशों में तेजी से फैलते संक्रमण के देखते हुए दो साल पहले डब्ल्यूएचओ ने एमपॉक्स को स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। इस बार भी बढ़ते जोखिमों को देखते हुए 14 अगस्त को इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया है।
3. एमपॉक्स संक्रमण को खतरनाक और जानलेवा माना जाता है। बच्चे, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इस संक्रमण के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं।
4. मुख्यरूप से समलैंगिक, बाइसेक्सुअल लोगों में संक्रमण के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं। यौन संबंधों के अलावा भी इस संक्रमण का जोखिम कई और तरीके से हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
5. संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क जैसे शरीर के तरल पदार्थों, ड्रॉपलेट्स और यौन संपर्क के माध्यम से इसके एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने का जोखिम रहता है।
6. संक्रमितों में त्वचा पर बड़े-बड़े छाले होने का साथ लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार की समस्या हो सकती है। हल्के लक्षण भी जानलेवा हो सकते हैं।
7. यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में गंभीर एमपॉक्स मामलों के लिए जेएनएनईओएस (जिसे इम्वाम्यून या इम्वेनेक्स के रूप में भी जाना जाता है) नामक चेचक के टीके को भी मंजूरी दी है।
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