देश के दक्षिणी राज्यों में मंकी फीवर की समस्या पिछले एक महीने से बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को यहां मंकी फीवर से एक और मौत का मामला सामने आया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) संक्रमित 65 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। यह इस जिले में इस रोग से होने वाली पहली मौत है। महिला की हालत बुधवार को गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हुई है।
Monkey Fever: कर्नाटक में रिपोर्ट की गई दूसरी मौत, बढ़ते संक्रमण के लेकर अलर्ट, जानिए इसके लक्षण-बचाव के तरीके
कर्नाटक सबसे प्रभावित राज्य
मंकी फीवर से कर्नाटक सबसे प्रभावित राज्य रहा है। राज्य में इसके फिलहाल 103 एक्टिव केस हैं, अब तक दो मौतें दर्ज की गई हैं। राज्य सरकार ने प्रभावी टीकाकरण के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ बातचीत की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिस तरह से राज्य में मंकी फीवर के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, ऐसे में सभी लोगों को इससे बचाव के उपायों के लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है। राज्य में पिछले एक महीने से यह बीमारी चिंता का कारण बनी हुई है। सभी लोगों को इसके लक्षणों के बारे में जानना और सुरक्षित रहने के लिए उपाय करना आवश्यक है।
क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के बारे में जानिए
मंकीफीवर को क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (केएफडी) भी कहा जाता है, जानवरों से इसके इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जंगली इलाकों में रहने वाले लोग, जहां पर बंदरों की आबादी अधिक होती है वहां पर इसके संक्रमण के फैलने का खतरा अधिक हो सकता है। बंदरों के शरीर में पाए जाने वाले टिक्स (किलनी) के काटने से इसके इंसानों में फैलने का खतरा रहता है। पर संक्रमित व्यक्ति से दूसरों में इसके संक्रमण के प्रसार के साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बचाव के लिए सावधानी बरतते रहना आवश्यक है।
मंकी फीवर के लक्षण और जोखिम
मंकी फीवर की समस्या में अचानक से बुखार और अन्य लक्षण शुरू हो सकते हैं। संक्रमण का इनक्यूबेशन पीरियड (ऊष्मायन अवधि) तीन दिनों से लेकर एक सप्ताह तक की हो सकती है। शुरुआत की स्थिति में बुखार के साथ, ठंड लगने, सिरदर्द और गंभीर थकावट की समस्या हो सकती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है इसके लक्षणों में मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त, भ्रम की समस्या का खतरा भी हो सकता है। कुछ स्थितियों में इसके कारण रक्तस्राव की दिक्कत जैसे नाक और मसूड़ों से खून आने का खतरा रहता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मंकी फीवर की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण ऑर्गन फेलियर तक की समस्या का भी खतरा हो सकता है।
मंकी फीवर का इलाज और बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये संक्रमण गंभीर स्थितियों में शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे ऑर्गन फेलियर हो सकती है। इस तरह के जोखिमों से बचाव के लिए जरूरी है कि समय रहते इसका उपचार किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मंकी फीवर के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टर सहायक चिकित्सा प्रदान करते हैं।
जिन क्षेत्रों में मंकी फीवर का खतरा अधिक होता है या एंडेमिक इलाकों में संक्रमण से बचाव के लिए टीके दिए जाते हैं। इसके अलावा सुरक्षात्मक कपड़े पहनने, टिक्स से बचाव करते रहना और प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा से बचने जैसे कुछ उपायों का पालन करके इस गंभीर रोग के खतरे से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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