महिलाओं की बढ़ती उम्र के साथ कुछ शारीरिक और मानसिक बदलाव आना भी लाजिमी है। मिड-लाइफ महिलाओं की जिंदगी का वह दौर होता है जब ज्यादा जीवंत हो सकती हैं। बशर्ते वो इसे सहजता से स्वीकार करें। मेनोपॉज ऐसा ही मिड-लाइफ फेज है जिससे हर औरत गुजरती है। वो वक्त जब किसी महिला का मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है। ऐसा डिंबग्रंथि (ओवरी) में सक्रियता समाप्त होने पर ही होता है। यदि किसी महिला को लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म नहीं हुआ हो तो यह माना जाता है कि उसे मेनोपॉज हो गया है।
महिलाओं के जीवन में कुदरती है मेनोपॉज, घबराने की नहीं बस ख्याल रखने की जरूरत
फोर्टिस अस्पताल की ऑब्सट्रीकल एंड गायनोलॉजी विभाग की हेड डॉक्टर अंजना सिंह के अनुसार, मेनोपॉज किसी भी महिला की जिंदगी में मनोवैज्ञानिक, शारीरिक तथा भावनात्मक बदलाव लेकर आता है। लेकिन यह जिंदगी में लड़खड़ाहट का लक्षण नहीं है। सच तो यह है कि मेनोपॉज आजादी का ऐलान है। इस दौर में पहुंचकर औरत अपने लाइफस्टाइल को नये सिरे से ढाल सकती है या जिंदगी में नयापन ला सकती है। याद रखें कि मेनोपॉज आपकी जिंदगी का एकदम कुदरती दौर है। बेशक, हर औरत में इसके लक्षण में फर्क हो सकते हैं।
मेनोपॉज की औसत उम्र 48 वर्ष है। इससे गुजरने वाली या मेनोपॉज उपरांत अधिकांश महिलाओं को हॉट फ्लैश, शरीर के ऊपरी भाग में एकाएक गर्मी महसूस होने या मुंह लाल होने और पसीने आने की शिकायत होती है। लेकिन हरेक को ऐसा अनुभव नहीं होता। मेनोपॉज के दौरान और इसके उपरांत शरीर में इस्ट्रोजेन के स्तर में कमी होने से हड्डियों में कैल्शियम घट सकता है। जिसकी वजह से ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है। इसी तरह, कार्डियोवास्क्युलर रोग और पेशाब पर नियंत्रण न रहने जैसे लक्षण बढ़ जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लें, जो आपके लक्षणों तथा मेडिकल हिस्ट्री को देखकर उचित सलाह दे सकती हैं।
-हरी सब्जियों और मौसमी फलों का सेवन करें।
-दूध और दही खाने में जरूर लें।
-कैल्शियम की कमी हो जाती है। हड्डियों में ज्यादा दर्द हो सकता है।
-बहुत गर्मी लगने लगती है।
-दाने हो सकते हैं।
-कार्डियोवास्क्युलर रोग हो सकता है।
-खान पान का ध्यान रखें।