कोरोना संक्रमण शरीर में कई तरह की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। विशेषकर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों ने कई तरह के गंभीर लक्षणों का अनुभव किया। लॉन्ग कोविड के रूप में इनमें से कई लक्षण लोगों में लंबे समय तक भी मौजूद रह सकते हैं। द लैंसेट जर्नल में इसी से संबंधित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कोरोना के ऐसे ही दो लक्षणों के बारे में बताया है जो लोगों में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने इन दो लक्षणों के बारे में लोगों को सचेत रहने को कहा है। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती रहने वाले रोगियों को पूरी तरह ठीक होने में एक साल से अधिक का समय लग सकता है।
सावधान: ऐसे रोगियों को कोरोना से ठीक होने में लग सकता है एक साल से अधिक का समय, लैंसेट अध्ययन में दावा
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सालभर तक बने रह सकते हैं कुछ लक्षण
अध्ययन से प्राप्त जानकारियों के आधार पर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से संक्रमित हर तीन में से एक को इन दोनों में से किसी लक्षण की समस्या एक साल से अधिक समय तक रह सकती है। चीन के वुहान शहर में 1,276 रोगियों पर किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रोगियों में कुछ लक्षणों के एक साल से अधिक समय तक भी रहने का खतरा हो सकता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं की इसी टीम इससे पहले अस्पताल में भर्ती 1,733 रोगियों के संक्रमण के छह महीने बाद की रिपोर्ट का अध्ययन किया था। इस अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया था कि तीन-चौथाई कोरोना संक्रमित लंबे समय तक कुछ लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। इस अध्ययन के दौरान 1,722 में से 1,276 रोगियों की स्थिति का करीब एक साल तक मूल्यांकन किया गया। निष्कर्ष में टीम ने पाया कि रोगियों के ज्यादातर लक्षण कुछ ही समय में ठीक हो जाते हैं। 68 प्रतिशत में कुछ लक्षण छह महीने जबकि 49 फीसदी लोगों में कुछ लक्षण करीब एक साल तक मौजूद रह सकते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
चीन में चीन-जापान मैत्री अस्पताल, नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी मेडिसिन के शोधकर्ता बिन काओ कहते हैं, कोरोना के ज्यादातर रोगी जल्दी ही अच्छी तरह से रिकवर हो जाते हैं, हालांकि कुछ में समस्याएं दीर्घकालिक हो सकती हैं। विशेष रूप से जिन रोगियों को अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत पड़ी थी उनमें कुछ लक्षण एक साल तक भी रह सकते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि रोगियों के पूरी तरह से ठीक होने में एक वर्ष से अधिक समय लग सकता है। महामारी के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की योजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है।
महिलाओं में दीर्घकालिक लक्षणों का खतरा अधिक
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि सांस की तकलीफ या फेफड़ों में दुर्बलता की समस्या के साथ मांसपेशियों में कमजोरी भी एक ऐसा ही लक्षण देखा जा रहा है, जो संक्रमण से ठीक हो चुके रोगियों में छह महीने तक बनी रह सकती है। पांच में से एक रोगी में यह समस्या हो सकती है। पुरुषों की तुलना में, महिलाओं में थकान और मांसपेशियों के कमजोरी की दीर्घकालिक समस्या 1.4 गुना अधिक हो सकती है। इसके अलावा महिलाओं में चिंता या अवसाद की संभावना पुरुषों के तुलना में दोगुनी जबकि फेफड़ों से संबंधित समस्याओं का खतरा तीन गुना तक अधिक हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ:
1-year outcomes in hospital survivors with COVID-19: a longitudinal cohort study
अस्वीकरण नोट: यह लेख द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।