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जानें क्यों चीन की वैक्सीन से दुनिया के कई देश बना रहे हैं दूरी, भारत के टीके पर जताया भरोसा

Sat, 23 Jan 2021 12:04 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Sat, 23 Jan 2021 12:04 PM IST
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Many countries of the world are relying on India vaccine instead of China vaccine
कोरोना वायरस वैक्सीन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए कई देशों ने वैक्सीन लगाने का काम शुरू कर दिया है, जिसमें से भारत और चीन भी एक हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहां एक तरफ दुनिया के कई देश भारत की वैक्सीन पर भरोसा जताते हुए इसकी मांग कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पहले से कोरोना वायरस की कई अहम जानकारियों को छिपाने जैसे गंभीर आरोप से घिरे चीन को वैक्सीन को लेकर भी झटका लगा है क्योंकि ज्यादातर देश ड्रैगन की वैक्सीन की जगह भारत के टीके के ऑर्डर दे रहे हैं। लेकिन शायद आप इसके पीछे की वजह से वाकिफ न हो। तो चलिए आपको इसके पीछे की असल वजह बताते हैं।

Many countries of the world are relying on India vaccine instead of China vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दरअसल, ब्राजील, कंबोडिया जैसे कई अन्य देशों ने या तो चीन से कोरोना वैक्सीन खरीद ली थी या फिर ऑर्डर दिया था, लेकिन अब ये भारत से कोरोना का टीका ले रहे हैं। ब्राजील को कमर्शियल सप्लाई के रूप में भारत ने वैक्सीन की 20 लाख डोज दी हैं। कोरोना वैक्सीन की कमर्शियल सप्लाई और अनुदान सहायता के लिए भारत को लगातार अनुरोध मिल रहे हैं। वहीं, इसमें तेजी तब से आई है जब से सात पड़ोसी देशों के लिए कोविशील्ड की 50 लाख डोज दी गई हैं। भारत की वैक्सीन पर विश्व के कई देश अपना विश्वास जता रहे हैं। जबकि चीन की वैक्सीन से लोग दूरी बनाते हुए नजर आ रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

चीन की वैक्सीन न लेने के पीछे इसके प्रभावी न होने की वजह है। बात ब्राजील की करें तो यहां चीन की वैक्सीन कोरोनावैक ट्रायल में 50 फीसदी के लगभग प्रभावी हुई, जिसके बाद इस पर सवाल खड़े होने लग गए। जबकि इंडोनेशियमा में हुए ट्रायल में चीनी वैक्सीन 65.3 प्रतिशत ही असर दिखा पाई। चीन की वैक्सीन सिनोवैक कई देशों में ट्रायल कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ इस बात पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर इस टीके का पूरा डेटा क्यों नहीं जारी किया जा रहा है। ये बात साफ है कि वैक्सीन का सुरक्षित होना बेहद जरूरी है, लेकिन चीन की वैक्सीन इन मैपानों पर काफी पीछे नजर आ रही है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

भले ही इंडोनेशिया चीन की कोरोनावैक वैक्सीन की 30 लाख डोज ले चुका है, लेकन फिर भी उसे भारत की एक्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर ज्यादा भरोसा है, और वो इसे खरीदने की योजना बना रहे हैं। इंडोनेशिया की इंडोफार्मा कंपनी कोविशील्ड बनाने वाली सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ संपर्क में है। वहीं, हाल ही में कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन ने भारतीय दूत देवयानी खोबरागड़े के साथ एक बैठक की, और इस दौरान उन्होंने भारत से वैक्सीन सहायता के लिए अनुरोध किया।

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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पेक्सेल्स

वहीं, नोम पेन्ह के अधिकारियों ने कहा कि उनका देश कोविशिल्ड और कोवैक्सीन दोनों में ही रूचि रखता है, क्योंकि ये दोनों वैक्सीन कंबोडिया के तापमान के लिए उपयुक्त हैं। वैसे, तो कंबोडिया चीन का सबसे बड़ा समर्थक रहा है। इसके पीछे ये वजह रही है कि चीन कंबोडिया को लगातार कर्ज देता रहा है, और वो कई बिलियन डॉलर का कर्ज उसे दे चुका है। कंबोडिया को चीन ने 10 लाख कोरोना वैक्सीन दी। लेकिन कंबोडिया की एक करोड़ 70 लाख की जनता के लिए और अधिक वैक्सीन चाहिए। ऐसे में उसने भारत की वैक्सीन की तरफ रूचि दिखाई है।

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