विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया को लेकर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि निकट भविष्य में मलेरिया से निजात पाने के कोई भी संकेत नहीं दिख रहे हैं। यह बीमारी जानलेवा बनती जा रही है। मलेरिया मच्छर जनित बीमारी है और हर साल अफ्रीका में इस बीमारी की चपेट में आने से 4 लाख 35 हजार लोगों की मौत होती है। तीन साल तक वैश्विक स्तर पर मलेरिया का विश्लेषण करने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यह संभावना नहीं दिख रही है कि निकट भविष्य में मलेरिया से निजात पाया जा सकता है। इस बीमारी से हर साल 20 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत होती है।
वैश्विक मलेरिया डायरेक्टर डॉक्टर पेड्रो अलोंसो का कहना है कि हमारे पास मलेरिया से निजात पाने के जो भी उपकरण हैं उनसे इस बीमारी का खात्मा असंभव है। उन्होंने कहा कि हमें मलेरिया से निजात पाने पर केंद्रित होना चाहिए। साल 2000 से 2015 के बीच दुनियाभर में देखा गया है कि मलेरिया से हर साल 864,000 से 429,000 लोगों की मौत हुई है। अलोंसो का कहना है कि मलेरिया से निजात पाने की दिशा में पिछले एक दशक से जो भी प्रगति हुई है वह बेहद धीमी है।
2050 तक अफ्रीका में भीषण बन जाएगा मलेरिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि साल 2050 तक अफ्रीका में मलेरिया के 1 करोड़ 10 लाख तक मामले सामने आएंगे। ऐसे में यह जरूरी है कि मलेरिया के खात्मे के लिए एक नियत तिथी तय करनी चाहिए। इससे निजात पाने के लिए जरूरी तैयारी होनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि हर साल मलेरिया के 20 करोड़ से ज्यादा मामले सामने आते हैं।
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साल 1995 से विश्व स्वास्थ्य संगठन तेजी से मलेरिया उन्मूलन अभियान चला रहा है। 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मलेरिया के खात्म के लिए वैश्विक अभियान चलाया था। इस अभियान का मकसद साल 2000 तक मलेरिया का खात्मा करना था लेकिन अभी तक जानलेवा बीमारी मलेरिया का खात्मा नहीं हुआ है। हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन मलेरिया अभियान और इसके बचाव वाले वैक्सीन में करोड़ों रुपए खर्च करता है। दक्षिण अफ्रीका में इस बीमारी ने घातक तौर पर लोगों को अपने चपेट में लिया है।
आपको बता दें कि श्रीलंका मलेरिया मुक्त हो गया है। साल 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने श्रीलंका को मलेरिया मुक्त घोषित कर दिया है। लेकिन भारत में यह बीमारी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल 25 अप्रैल को वर्ल्ड मलेरिया डे मनाता है ताकि इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाकर इसका खात्म हो सके।