कम सुनाई देने या बहरेपन की समस्या पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ती देखी गई है। आश्चर्यजनक रूप से बच्चों-युवाओं में इसका जोखिम तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर 34 मिलियन (3.4 करोड़) से अधिक बच्चों में बहरेपन या सुनने की क्षमता में कमी देखी गई है, जिनमें से 60% मामले ऐसे हैं जिन्हें रोका जा सकता था।
सावधान: ये छोटी सी लापरवाही आपको बना सकती है बहरा, बच्चों-युवाओं में देखा गया सबसे ज्यादा खतरा
ईयरफोन-हेडफोन की तेज ध्वनि नुकसानदायक
अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि ईयरफोन-हेडफोन की ध्वनि जितनी तेज होगी, श्रवण हानि होने का खतरा उतना अधिक हो सकता है। इन उपकरणों का एक्सपोजर जितना लंबा होगा, बहरेपन का जोखिम भी उतना अधिक बढ़ जाता है। इन उपकरणों का इस्तेमाल या तो बहुत कम करें या फिर आवाज को बिल्कुल कम रखें।
ध्वनि को डेसीबल (dB) में मापा जाता है, यह जितना अधिक होगा कानों की नाजुक मांसपेशियों को क्षति पहुंचने का खतरा उतना बढ़ जाता है। तेज शोर के कारण आंतरिक कान की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है।
कितनी तेज आवाज है खतरनाक?
अध्ययनकर्ता मानते हैं कि 30-50 डीबी की आवाज में कुछ समय के लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि जैसे-जैसे ये बढ़ता जाता है, दुष्प्रभाव भी बढ़ने लगते हैं। लंबे समय तक 70 डीबी से ऊपर की आवाज आपकी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचाना शुरू कर सकती है। 120 डीबी से ऊपर का तेज शोर आपके कानों को तत्काल नुकसान पहुंचा सकता है।
हालिया शोध में पाया गया है कि कुछ घंटों तक 80 डीबी तीव्रता वाली आवाज आपको बहरा भी बना सकती है।
अध्ययन में क्या पता चला?
बीएमजे पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित शोधपत्र में 14 अध्ययनों की समीक्षा की गई, जिसमें कुल मिलाकर 50,000 से अधिक लोग शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो बच्चे लंबे समय तक हेड फोन्स लगाकर गेम खेलते हैं उनमें बहरेपन का जोखिम अधिक देखा गया है।
शोधकर्ता कहते हैं, जिन लोगों ने 80-90 डीबी की तीव्रता में सप्ताह में तीन घंटे से अधिक समय तक आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया उनमें कम सुनाई देने या बहरेपन का जोखिम अधिक था।
बच्चों को हेडफोन्स के अधिक इस्तेमाल से रोकें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, श्रवण हानि या टिनिटस जैसी कानों की समस्याओं से बचाव के लिए साउंड या अन्य उपकरणों से निकलने वाली ध्वनि को कम रखें। वॉल्यूम हमेशा 50% से कम ही रखें है। कानों को आराम देने के लिए नियमित ब्रेक लें। यदि आप शोर-शराबे वाले वातावरण में रहते हैं तो नॉइस कैंसिलेशन वाले उपकरणों का प्रयोग करें।
वहीं अगर कुछ समय से सुनने में दिक्कत या कानों में दर्द-असहजता बनी हुई है तो समय रहते डॉक्टर से मिलकर जांच जरूर कराएं। बच्चों को हेडफोन्स के अधिक इस्तेमाल से रोकना भी आवश्यक है।
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स्रोत और संदर्भ
Risk of sound-induced hearing loss from exposure to video gaming or esports
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