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अध्ययन में दावा: पैरासिटामोल के अधिक सेवन से बढ़ जाता है हृदय रोग-स्ट्रोक का खतरा, जानिए किन्हें खतरा अधिक?
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली
शरीर में हल्का दर्द या बुखार होने पर ज्यादातर लोग आमतौर पर ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) दवाओं को प्रयोग में लाते हैं। इन दवाओं से कुछ पल में राहत तो मिल जाती है, पर क्या आपको अंदाजा है कि बिना डॉक्टर की सलाह के ली जाने वाली इन दवाओं का शरीर पर कितना गंभीर असर हो सकता है? भारत में सामान्य दर्द और फ्लू जैसे लक्षणों में पैरासिटामोल ले लेना काफी आम बात है, पर हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसके गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को सचेत किया है। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने चेताया है कि पैरासिटामोल का अधिक सेवन हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।
जर्नल सर्कुलेशन अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि पैरासिटामोल का अधिक सेवन करने से हाइपरटेंशन की समस्या बढ़ जाती है, जोकि दीर्घकालिक तौर पर हृदय रोग का कारण बन सकती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हृदय रोगियों को पैरासिटामोल प्रिस्क्राइब करने से पहले डॉक्टरों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। शोधकर्ताओं ने बताया कि वैसे तो इसके सामान्य इस्तेमाल के दुष्प्रभाव नहीं हैं हालांकि इसका लगातार लंबे समय तक उपयोग करते रहना गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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हार्ट अटैक का बढ़ सकता है खतरा
- फोटो : Pixabay
कुछ ही दिनों में बढ़ा देता है ब्लड प्रेशर
पैरासिटामोल के इस्तेमाल के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर वाले 110 रोगियों पर अध्ययन किया। इन रोगियों के दो अलग-अलग समूहों को दिन में चार बार एक ग्राम पैरासिटामोल या इसी मात्रा में प्लेसीबो दिया गया। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि चार दिन के भीतर ही पैरासिटामोल ले रहे समूह के लोगों का ब्लड प्रेशर, प्लेसीबो वाले लोगों की तुलना में काफी बढ़ गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि इस स्थिति में दिल का दौरा पड़ने या स्ट्रोक की आशंका 20 फीसदी तक बढ़ जाती है।
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दवाइयों के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानी
- फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में चिकित्सीय और क्लिनिकल फार्माकोलॉजी के अध्यक्ष प्रोफेसर डेविड वेब कहते हैं, आईब्रुफेन जैसी दवाइयां, जिनको रक्तचाप बढ़ाने का कारक माना जाता रहा है, इसके इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने के दौरान माना जा रहा था कि पैरासिटामोल इसका सुरक्षित विकल्प हो सकता है। हालांकि जिस तरह के अध्ययन के परिणाम देखने को मिल रहे हैं इस आधार पर दिल का दौरा या स्ट्रोक के जोखिम वाले रोगियों में पैरासिटामोल के उपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पैरासिटामोल प्रिस्क्राइब करते समय चिकित्सकों को इसके डोज को लेकर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
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दवाओ के भी हो सकते हैं दुष्प्रभाव (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
इन बातों को लेकर वैज्ञानिकों ने चेताया
शोधकर्ताओं का कहना है कि डॉक्टर इस बात का भी ध्यान रखें कि जिन रोगियों को क्रोनिक पेन के लिए पैरासिटामोल देने की जरूरत है, उन्हें रक्तचाप को नियंत्रण में रखने के लिए अलग दवा भी दी जानी चाहिए। यूके का जिक्र करते हुए अध्ययन में बताया गया है कि यहां लगभग 10 में से एक व्यक्ति को क्रोनिक पेन के लिए पैरासिटामोल दी जाती है, जबकि चिंताजनक बात यह है कि यहां तीन में से एक वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। सभी लोगों को भी बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयों के सेवन से बचना चाहिए। कुछ दवाइयां तुरंत तो लाभ दे देती हैं पर इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
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दवाओं के सेवन को लेकर डॉक्टर की सलाह जरूरी
- फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
पैरासिटामोल से हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को लेकर अमर उजाला से बातचीत में डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन) बताते हैं, किसी भी दवा के बहुत ज्यादा इस्तेमाल के दुष्प्रभाव हो सकते हैं, पर अगर आप 5-7 दिन के बुखार में दिन में दो-तीन बार पैरासिटामोल ले रहे हैं तो सामान्यत: इससे नुकसान का खतरा नहीं है। आमतौर पर पैरासिटामोल का सबसे ज्यादा नकारात्मक असर लिवर पर पड़ता है, पर यहां जरूरी बात यह है कि अगर हम ड्रग अब्यूज नहीं कर रहे हैं तो इसकी भी आशंका कम है।
अध्ययन के संदर्भ में डॉ विक्रमजीत कहते हैं, इसकी प्रमाणिकता जानने के लिए बड़े स्तर पर शोध की आवश्यकता है, इस अध्ययन का सैंपल छोटा है। फिलहाल सभी लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ही किसी भी दवा का सेवन करना चाहिए, खुद से ली गई दवाएं सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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