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ICMR Study: सिर्फ लॉन्ग कोविड ही नहीं, कोरोना के दौरान फैली इस बीमारी का भी अब तक देखा जा रहा है गंभीर असर

Sat, 12 Jul 2025 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 12 Jul 2025 07:31 PM IST
सार

  • आईसीएमआर ने एक अध्ययन में बताया कि कोरोना के दौरान फैली घातक बीमारी म्यूकोरमाइकोसिस का भी लोगों पर दीर्घकालिक रूप से असर देखा जा रहा है।
  • यह शोध ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही कोविड-19 महामारी और इसके दीर्घकालिक परिणामों से जूझ रहा है। 

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long term effects of mucormycosis ICMR study Black Fungus during the COVID-19 pandemic
कोरोना महामारी के दौरान म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा (सांकेतिक) - फोटो : Adobe stock photos

साल 2019 के आखिरी के दिनों में कोरोना महामारी की शुरुआत हुई, इसे पांच साल से अधिक का समय बीत चुका है पर अब भी विशेषज्ञ स्पष्ट नहीं हैं कि इससे लोगों को पूरी तरह से मुक्ति कब मिलेगी? मिलेगी भी या नहीं? 



कोरोना ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया। संक्रमण की स्थिति में, विशेषकर डेल्टा वैरिएंट के कारण हुई गंभीर बीमारियों ने लाखों लोगों की जान ले ली। इतना ही नहीं कई अध्ययन इस बात को लेकर भी लगातार चिंता जताते रहे हैं कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण रह चुका है, उनमें इसके कारण लंबे समय तक असर (लॉन्ग कोविड) बना रह सकता है। इसी से संबंधित एक अन्य रिपोर्ट आपकी चिंता और बढ़ाने वाली हो सकती है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक हालिया अध्ययन में बताया कि कोरोना के दौरान फैली घातक बीमारी म्यूकोरमाइकोसिस का भी लोगों पर दीर्घकालिक रूप से असर बना रह सकता है। इस अध्ययन में पाया गया है कि म्यूकोरमाइकोसिस से ठीक होने वाले लोगों में कई प्रकार के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव (जैसे चेहरे की विकृति और बोलने में कठिनाई) देखे जा रहे हैं।

पोस्ट या लॉन्ग कोविड को लेकर जारी चिंताओं के बीच इस रिपोर्ट ने विशेषज्ञों की और भी टेंशन बढ़ा दी है।

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अस्पताल में भर्ती म्यूकोरमाइकोसिस के मरीज (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com

म्यूकोरमाइकोसिस क्या है?

म्यूकोरमाइकोसिस या ब्लैक फंगस, एक प्रकार का गंभीर फंगल संक्रमण होता है। आमतौर पर इम्यूनोसप्रेसिव दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों में इस संक्रमण का खतरा अधिक होता है। ऐसी दवाइयां शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती हैं, इससे पर्यावरणीय रोगजनकों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। मधुमेह जैसी बीमारियों के शिकार लोगों में इस संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। कोविड-19 के दौरान कुछ विशेष दवाइयों के प्रयोग के कारण इस संक्रमण का खतरा बढ़ गया था।


कोरोना महामारी के दौरान बढ़े थे म्यूकोरमाइकोसिस के मामले

कोविड-19 महामारी के दौरान एक दुर्लभ संक्रमण म्यूकोरमाइकोसिस के मामलों में वृद्धि देखी गई, इसे 'ब्लैक फंगस' भी कहा जाता है।

एक प्रमुख माइक्रोबायोलॉजी पत्रिका, क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शन में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि अस्पताल में भर्ती म्यूकोरमाइकोसिस के 686 रोगियों में से 14.7 प्रतिशत की एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो गई, और अधिकांश मौतें अस्पताल में प्रारंभिक भर्ती होने के दौरान हुईं।

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म्यूकोरमाइकोसिस के कारण होने वाली दीर्घकालिक समस्याएं - फोटो : Adobe stock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) के डॉ. रिजवानअब्दुलकादर ने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस संक्रमण के दौरान जिन रोगियों को एंटीफंगल दवाएं और सर्जिकल उपचार दिए गए थे उनकी जीवित रहने की दर अधिक थी। हालांकि इस रोग से ठीक हो चुके कई लोगों को लंबे समय तक कई प्रकार की विकृति और मनोवैज्ञानिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है।

रोग से ठीक हो चुके 70 प्रतिशत से अधिक रोगियों में कम से कम एक समस्या (स्वास्थ्य जटिलता या विकलांगता)  देखी गई है, जो काफी चिंताजनक है।

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म्यूकोरमाइकोसिस के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com

686 मरीजों पर किया गया अध्ययन

डॉ रिजवान और अखिल भारतीय म्यूकोरमाइकोसिस कंसोर्टियम के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में म्यूकोरमाइकोसिस के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार के परिणामों और ठीक होने के बाद जीवन की गुणवत्ता का आकलन किया गया। इसके लिए 26 अस्पतालों के 686 मरीजों को शामिल किया गया। 

डॉ रिजवान कहते हैं, वैसे तो ये कोई अमूर्त जटिलताएं नहीं हैं। चेहरे का विकृत होना, बोलने में कठिनाई, चिंता जैसी समस्याएं कई जीवित बचे लोगों के लिए एक वास्तविकता है। अब समय आ गया है कि भारत जीवन रक्षक उपायों से आगे बढ़कर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और बीमारियों से ठीक हो चुके लोगों की जीवन गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में भी ध्यान केंद्रित करे।

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संक्रमण और उसके जोखिमों को लेकर अलर्ट - फोटो : freepik

लॉन्ग कोविड के बाद एक नई चिंता

यह शोध ऐसे समय में आया है जब भारत पहले से ही कोविड-19 महामारी और इसके दीर्घकालिक परिणामों से जूझ रहा है। 

अध्ययन के निष्कर्ष में डॉ रिजवान ने कहा, म्यूकोरमाइकोसिस केवल कोविड-19 की एक जटिलता नहीं है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए दीर्घकालिक नैदानिक ध्यान, सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को बढ़ाने की आवश्यकता है।

म्यूकोरमाइकोसिस का शिकार रहे लोगों में देखी जा रही दीर्घकालिक समस्याओं के उपचार और रोगियों की क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार पर ध्यान देना बहुत आवश्यक हो गया है।



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स्रोत और संदर्भ
A case control investigation of COVID-19 associated mucormycosis in India


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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