पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना के संक्रमण ने लोगों की सेहत को कई तरह से प्रभावित किया है। कोरोना के सामने आए वैरिएंट्स के कारण जहां कुछ लोगों में गंभीर रोग के मामले देखने को मिले वहीं ज्यादातर लोगों में संक्रमण से ठीक हो जाने के लंबे समय बाद तक भी बने लॉन्ग कोविड के लक्षण मुश्किलें बढ़ाने वाली हैं। शुरुआती संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी महीनों तक महसूस होने वाली दिक्कतों को लॉन्ग कोविड या पोस्ट कोविड सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वैश्विक स्तर पर उभरती बड़ी चुनौती है, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ा दिया है।
Covid-19: नए वैरिएंट्स से खतरे के साथ लॉन्ग कोविड भी बड़ा चैलेंज, संक्रमण के एक साल बाद तक भी नहीं जा रहे लक्षण
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लंबे समय तक परेशान कर सकती है लॉन्ग कोविड की समस्या
द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना से ठीक हो जाने के एक साल बाद तक, अस्पताल में भर्ती रह चुके चार में से तीन लोग अब भी किसी न किसी समस्या के शिकार हैं। सिर्फ एक व्यक्ति को पूरी तरह से लक्षणों से मुक्त देखा जा रहा है। यह आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। कुछ स्थितियां लोगों में लॉन्ग कोविड के जोखिम को बढ़ा देती हैं। जो लोग मोटापा के शिकार हैं या फिर इलाज के दौरान जिन्हें वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत पड़ी थी, उनमें एक साल बाद तक भी कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं।
लॉन्ग कोविड के जोखिम
लॉन्ग कोविड के जोखिमों के बारे में ब्रिटेन के लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस शोध से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पोस्ट कोविड समस्याओं का खतरा अधिक होता है। एक साल से अधिक समय तक कई लोगों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, नींद की समस्या और सांस फूलने की दिक्कत बनी हुई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रभावी उपचार के बिना, लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के लक्षण नई दीर्घकालिक समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।
शोध में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं ने लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए 2,320 प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया। इसमें कई स्तर पर किए गए जांच में अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 319 लोगों में साल भर से अधिक समय तक गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बनी हुई हैं। वहीं 179 लोगों में संज्ञानात्मक समस्याओं के मामले देखे गए। 645 लोगों में एक साल से अधिक समय तक हल्के मानसिक और शारीरिक लक्षण बने हुए पाए गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि लक्षणों की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करती है।
अध्ययन का निष्कर्ष
अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि मोटापा, व्यायाम की कमी, संक्रमण के दौरान गंभीर लक्षणों का अनुभव और इंफ्लामेटरी बायोमार्कर सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर में वृद्धि के कारण पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्या गंभीर लक्षणों को जन्म दे सकती है। जिन लोगों में गंभीर और मध्यम लक्षण वाले संज्ञानात्मक हानि के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, उनमें इंफ्लामेटरी बायोमार्कर इंटरल्यूकिन-6 (IL-6) का स्तर अधिक पाया गया। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।