लिवर हमारे शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। करीब 1.5 किलो का ये अंग कई महत्वपूर्ण कार्य करता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत आवश्यक माने जाते हैं। पर क्या आप अपने लिवर का सही तरीके से ख्याल रखते हैं? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि दुनियाभर में लिवर से संबंधित बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।
Liver Disease: 20 साल में दोगुने हो गए लिवर सिरोसिस के मरीज, हर दूसरा रोगी इस आदत का शिकार
देश में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) के बढ़ते मामले काफी चिंताजनक हैं। एक अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 20 साल में लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इसमें 43 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनको शराब पीने के कारण ये बीमारी हुई है।
फैटी लिवर के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, देश में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) के बढ़ते मामले काफी चिंताजनक हैं, इसके कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ता जा रहा है। सितंबर में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (एनएएफएलडी) डिजीज तेजी से प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता के रूप में उभरती समस्या है। युवाओं में इसका खतरा और भी बढ़ गया है। देश में हर दस में से करीब तीन लोग इस समस्या के शिकार देखे जा रहे हैं।
एनएएफएलडी और कई प्रकार की मेटाबॉलिक बीमारियों जैसे मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों के बीच संबंध पाया गया है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के शिकार लोगों की निरंतर देखभाल और इलाज बहुत महत्वपूर्ण है।
एम्स विशेषज्ञों ने लिवर सिरोसिस को लेकर जताई चिंता
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार से संबंधित गड़बड़ियों ने लिवर से संबंधित जिन रोगों को काफी बढ़ा दिया है, लिवर सिरोसिस की समस्या भी उनमें से एक है। पिछले 20 साल में लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इसमें 43 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनको शराब पीने के कारण ये बीमारी हुई है। इतना ही नहीं चिंताजनक बात ये भी है कि स्कूल जाने वाले बच्चे भी शराब पीने से परहेज नहीं कर रहे।
ये एक आदत युवा आबादी में तेजी से लिवर रोगों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। जिन घरों में शराब पीना आम बात है, उन घरों के बच्चों में इसकी आदत मिल रही है।
लिवर के हर दूसरे मरीज को शराब की आदत
एम्स के एक शोध में खुलासा हुआ है कि लिवर के हर दूसरे वयस्क मरीज को शराब की लत है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रहन सहन में आए बदलाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों के लिए शराब पीना जीवन शैली का हिस्सा बन गया है, जो शरीर को कई प्रकार से क्षति पहुंचाने वाली मानी जाती रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में 25 से 45 साल के लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। कारणों के परीक्षण में डॉक्टर्स ने पाया कि इसमें से अधिकतर लोगों को शराब पीने की लत है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस शोध के लिए देशभर से 41,432 लोगों को शामिल किया गया जिनपर 147 शोध हुए। इस शोध में शराब के कारण 17,898 (43.2%) मरीजों में, हेपेटाइटिस बी वायरस के कारण 4764 (11.5%) मरीजों में, हेपेटाइटिस सी वायरस के कारण 2568 (6.2%) मरीजों में और नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग/ क्रिप्टोजेनिक रोग के कारण 5966 (14.4%) मरीजों में सिरोसिस का खतरा पाया गया है।
अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले तीन दशकों में शराब से संबंधित सिरोसिस का अनुपात काफी बढ़ गया है, जबकि वायरल से संबंधित सिरोसिस के अनुपात में गिरावट देखी गई है। शराब के सेवन से लिवर में वसा जमा होने लगती है जो लिवर के सामान्य कार्य में रुकावट डाल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं लिवर की बीमारी से बचे रहने के लिए शराब की आदत से दूरी बनाना सबसे जरूरी है।
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स्रोत और संदर्भ
The Pattern of Alcohol Use in Alcohol-Related Cirrhosis in Indian Patients: AUDIT Indian Liver Study
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