केरल इन दिनों गंभीर संक्रामक बीमारी की चपेट में है। पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश और जलजमाव के कारण जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार-सोमवार को केरल के कई जिलों में बारिश को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया। बुधवार तक यहां बारिश जारी रहने की आशंका जताई गई है।
Leptospirosis: केरल में इस संक्रामक बीमारी से 40 से अधिक की मौत, जानिए इसके लक्षण से लेकर बचाव तक सबकुछ
लेप्टोस्पायरोसिस हो सकती है जानलेवा
एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की केरल इकाई के डॉ. राजीव जयदेवन बताते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित 10 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों उन्हें समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा दूषित जल के संपर्क में आने से बचना चाहिए। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
आइए लेप्टोस्पायरोसिस रोग और इसके लक्षणों के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी?
लेप्टोस्पायरोसिस, लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारी है। दूषित जल का आपकी नाक, मुंह, आंखों में चले जाने या फिर त्वचा में किसी घाव से इसके संपर्क के कारण ये बीमारी हो सकती है। ये जूनोटिक रोग माना जाता है, जिसका मतलब है कि ये इंसानों और जानवरों के बीच फैलने वाली बीमारी है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल दुनियाभर में 10 लाख से अधिक लोग इस संक्रामक रोग के शिकार होते हैं जिनमें से 60 हजार से अधिक की मौत हो जाती है। इसके लक्षणों पर समय रहते ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना जरूरी माना जाता है।
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों की समय पर करें पहचान
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण फ्लू जैसे होते हैं हालांकि गंभीर मामलों में ये आंतरिक रक्तस्राव और अंगों की क्षति का भी कारण बन सकती है। संक्रमण की शुरुआती स्थिति में तेज बुखार, आंखों में संक्रमण-लालिमा, सिरदर्द, ठंड लगने, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और पीलिया जैसी समस्या हो सकती है।
संक्रमण का समय पर इलाज न होने के कारण लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा रहता है जिसमें खांसी के साथ खून आने (हेमोप्टाइसिस), छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब में खून आने जैसे आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं।
संक्रमण का इलाज और बचाव के तरीके
लक्षणों के आधार पर लेप्टोस्पायरोसिस के लिए आवश्यक उपचार विधियों को प्रयोग में लाया जाता है। संक्रमण की स्थिति के आधार पर एंटीबायोटिक के माध्यम से उपचार किया जाता है।
संक्रमण के जोखिमों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि आप दूषित जल के संपर्क में आने से बचें। जानवरों के संपर्क से भी दूरी बनाकर रखें। पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें या फिर पानी को उबालकर उसे ठंडा करके पिएं। अगर आपके शरीर में कहीं घाव है तो उसकी उचित देखभाल करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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