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Leptospirosis: केरल में इस संक्रामक बीमारी से 40 से अधिक की मौत, जानिए इसके लक्षण से लेकर बचाव तक सबकुछ

Mon, 27 May 2024 12:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 27 May 2024 12:30 PM IST
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केरल में संक्रामक बीमारी के मामले - फोटो : istock

केरल इन दिनों गंभीर संक्रामक बीमारी की चपेट में है। पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश और जलजमाव के कारण जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार-सोमवार को केरल के कई जिलों में बारिश को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया। बुधवार तक यहां बारिश जारी रहने की आशंका जताई गई है।



प्री-मानसून बारिश और जलजमाव ने स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। यही कारण है राज्य के कई जिलों में लेप्टोस्पायरोसिस नामक संक्रामक बीमारी के मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। राज्य में लेप्टोस्पायरोसिस से अब तक 41 से ज्यादा मौतें भी हो चुकी हैं।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दूषित पानी के संपर्क में आने के कारण इस संक्रामक रोग के फैलने का जोखिम अधिक देखा जाता है। बुखार और सिरदर्द के साथ शुरू होने वाले इस संक्रमण के लक्षण समय के साथ गंभीर होते जाते हैं जिसके कारण जानलेवा समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। केरल में जिन स्थानों पर बारिश जारी है वहां पर लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।

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संक्रमण के जोखिम कारक - फोटो : Freepik

लेप्टोस्पायरोसिस हो सकती है जानलेवा

एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की केरल इकाई के डॉ. राजीव जयदेवन बताते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित 10 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों उन्हें समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार प्राप्त करना जरूरी है। इसके अलावा दूषित जल के संपर्क में आने से बचना चाहिए। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।

आइए लेप्टोस्पायरोसिस रोग और इसके लक्षणों के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।

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संक्रमण के गंभीर मामलों के बारे में जानिए - फोटो : istock

क्या है लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी?

लेप्टोस्पायरोसिस, लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारी है। दूषित जल का आपकी  नाक, मुंह, आंखों में चले जाने या फिर त्वचा में किसी घाव से इसके संपर्क के कारण ये बीमारी हो सकती है। ये जूनोटिक रोग माना जाता है, जिसका मतलब है कि ये इंसानों और जानवरों के बीच फैलने वाली बीमारी है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो हर साल दुनियाभर में 10 लाख से अधिक लोग इस संक्रामक रोग के शिकार होते हैं जिनमें से 60 हजार से अधिक की मौत हो जाती है। इसके लक्षणों पर समय रहते ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना जरूरी माना जाता है। 

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संक्रमितों में बुखार के लक्षण - फोटो : istock

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों की समय पर करें पहचान

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण फ्लू जैसे होते हैं हालांकि गंभीर मामलों में ये आंतरिक रक्तस्राव और अंगों की क्षति का भी कारण बन सकती है। संक्रमण की शुरुआती स्थिति में तेज बुखार, आंखों में संक्रमण-लालिमा, सिरदर्द, ठंड लगने, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और पीलिया जैसी समस्या हो सकती है।

संक्रमण का समय पर इलाज न होने के कारण लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा रहता है जिसमें खांसी के साथ खून आने (हेमोप्टाइसिस), छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब में खून आने जैसे आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं। 

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संक्रामक रोगों से बचाव के तरीके - फोटो : istock

संक्रमण का इलाज और बचाव के तरीके

लक्षणों के आधार पर लेप्टोस्पायरोसिस के लिए आवश्यक उपचार विधियों को प्रयोग में लाया जाता है। संक्रमण की स्थिति के आधार पर एंटीबायोटिक के माध्यम से उपचार किया जाता है।

संक्रमण के जोखिमों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि आप दूषित जल के संपर्क में आने से बचें। जानवरों के संपर्क से भी दूरी बनाकर रखें। पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें या फिर पानी को उबालकर उसे ठंडा करके पिएं। अगर आपके शरीर में कहीं घाव है तो उसकी उचित देखभाल करें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत या फिर शोधपत्र के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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