वैश्विक स्तर पर डायबिटीज का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। साल 2021 में दुनियाभर में 529 मिलियन (करीब 53 करोड़) लोगों को इस क्रोनिक बीमारी का शिकार पाया गया था। शोधकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा है कि जिस गति से डायबिटीज के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में आशंका है कि अगले 25-30 वर्षों में साल 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर 1.3 बिलियन (130 करोड़) से अधिक हो सकता है। यह बीमारी सभी उम्र के लोगों- पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करती है।
Lancet Study: इस जानलेवा रोग के बढ़ते मामलों को लेकर विशेषज्ञ चिंतित, 2050 तक 130 करोड़ हो सकते हैं इसके रोगी
तीन दशकों में दोगुने हो सकते हैं डायबिटीज के रोगी
इस अध्ययन के लिए साल 2021 के 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' की जानकारियों का उपयोग किया गया, जिसमें शोधकर्ताओं ने 1990 से 2021 तक 204 देशों में मधुमेह के मामलों, इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं-जटिलाओं और मृत्यु दर की जांच की। इसी के आधार पर 2050 तक मधुमेह के जोखिमों को लेकर अनुमान लगाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र ने एक अनुमान में कहा है कि 2050 तक दुनिया की कुछ आबादी लगभग 9.8 बिलियन (980 करोड़) से अधिक हो सकती है। उस समय तक लगभग हर सात में से एक व्यक्ति में मधुमेह का खतरा हो सकता है।
कई देशों की आधी से अधिक आबादी हो सकती है प्रभावित
ब्रिटेन स्थित वारविक यूनिवर्सिटी में मधुमेह रोगियों पर शोधकर्ता विशेषज्ञ डॉ स्टीफन लॉरेंस कहते हैं, इस शोध के लिए बहुत सटीक मॉडलिंग अध्ययनों का उपयोग किया है, इसलिए यह सिर्फ हवा में उंगली घुमाकर अनुमान लगाने जैसा नहीं है। 2021 में दुनियाभर में 529 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित थे, जिसका वैश्विक प्रसार 6.1% था। अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2050 तक 204 देशों में 43.6% से अधिक इसका प्रसार हो सकता है।
कतर में आयु-से संबंधित मधुमेह का प्रसार सबसे अधिक था, 2021 में 75-79 वर्ष की आयु के 76% लोग इस बीमारी से पीड़ित थे। इसके और भी बढ़ने की आशंका जताई गई है।
मोटापे के कारण बढ़ रहा है खतरा
अध्ययनकर्ताओं ने शोध में लिखा- टाइप 2 मधुमेह, जो मधुमेह के अधिकांश मामलों का कारण बनता है, इसके मामले सबसे अधिक बढ़ने की आशंका है। राहत की बात यह है कि इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। कुछ मामलों में, यदि बीमारी के शुरुआती दौर में ही पहचान कर इसका प्रबंधन किया जाए तो इसके जोखिमों को काफी कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
दुनियाभर में मधुमेह के बढ़ते मामलों के लिए मुख्यरूप से जिन कारकों को जिम्मेदार पाया गया है- मोटापा में वृद्धि उसमें से शीर्ष पर है।
इन कारणों को भी पाया गया जिम्मेदार
मोटापे के अलावा टाइप-2 डायबिटीज की दर में वैश्विक वृद्धि के लिए जिन कारणों को प्रमुख पाया गया है, उनमें आहार और जीवनशैली की खराब आदतें भी शामिल हैं। प्रोफेसर लॉरेंस कहते हैं, हाइपरकैलोरी खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन के कारण खतरा और भी बढ़ रहा है। दुर्भाग्य से हमारे जीन इससे निपटने के लिए नहीं बने हैं। टाइप-2 डायबिटीज विकसित होने के लिए व्यक्ति और पर्यावरण के संयुक्त प्रयास की आवश्यकता होती है।
अल्ट्राप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के अलावा शारीरिक निष्क्रियता सीधे तौर पर मोटापे को बढ़ा रही है जो डायबिटीज का कारण है। अगर इसपर कंट्रोल न किया गया तो अगले 50 साल में डायबिटीज के आंकड़े और भी गंभीर हो सकते हैं।
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स्रोत और संदर्भ
Global, regional, and national burden of diabetes from 1990 to 2021, with projections of prevalence to 2050: a systematic analysis for the Global Burden of Disease Study 2021
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