Medically reviewed by Dr. Vishesh Akole
डॉ विशेष अकोले, जनरल फिजिशियन
संत रविदास हॉस्पिटल, इंदौर
डिग्री- एम.बी.बी.एस
अनुभव- 28 वर्ष
एक सभ्य नागरिक बनाने के लिए हमें ठीक से हाथों को साफ करना, दांतों को ब्रश करना या भोजन को ठीक से चबाना सिखाया जाता है। लेकिन बहुत ही कम लोगों को इसका शऊर होता है कि ठीक से छींका कैसे जाए और पिछले डेढ़ साल में हम देख ही चुके हैं कि सही तरीके से न छींकने से किस तरह से कोरोना महामारी के संक्रमण को फैलाया गया है इसलिए बहुत जरूरी है कि आज की तारीख में हमें छींक के बारे में सही जानकारी हो, साथ ही हमें पता हो कि छींकने का सही तरीका क्या होता है। छींकते वक्त किन चीजों का ध्यान रखकर हम अपने साथ न जाने कितने ही लोगों की सेहत का ध्यान रख सकते हैं, उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं छींक से जुड़ी काम की बातें, जो हम सभी को पता होना चाहिए।
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गति 30 मील प्रति घंटा भी हो सकती है
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क्यों आती है छींक?
हमें छींक इसलिए आती है क्योंकि यह शरीर की प्रतिक्रियात्मक क्रिया है। नाक के भीतर किसी भी प्रकार की जलन या उत्तेजना होने पर शरीर खास किस्म का केमिकल सिग्नल मस्तिष्क को भेजता है। इसके परिणामस्वरूप हवा का तीव्र निष्कासन नाक और मुंह द्वारा होता है जिसकी गति 30 मील प्रति घंटा भी हो सकती है।
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हर छींक के बाद हाथ धोना न भूलें
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यह है सही तरीका
किसी टिश्यू में छींक कर उसे तुरंत फेंक दें। टिश्यू न हो तो छींकते वक्त नाक को कोहनी से ढंक लें। यदि लम्बी बांह का शर्ट आदि पहना है तो और भी अच्छा। इसका फायदा है कि आपकी कोहनी से कीटाणु अन्य जगह नहीं फैल पाएंगे और कपड़े के कारण कीटाणु वातावरण में भी नहीं फैल पाएंगे। लेकिन, हर छींक के बाद हाथ धोना न भूलें।
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यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है
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न रोकें छींक
यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है खासकर उनके लिए जिन्हें कान में संक्रमण या रक्तचाप की समस्या है। इससे नाक से रक्त आना, सिरदर्द, चक्कर आना, कान में कोई संक्रमण, साइसाइटिस जैसी परेशानियां हो सकती हैं। एक मामले में ब्रिटिश नागरिक को नाक और मुंह दबाकर छींक रोकने के कारण अपनी आवाज खोनी पड़ी थी।
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फोटिक स्नीज रिफ्लेक्स या सोलर स्नीज रिफ्लेक्स कहा जाता है
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धूप के कारण छींक
कई लोगों को तेज धूप में देखते ही छींक आने लगती है। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं है। इसे फोटिक स्नीज रिफ्लेक्स या सोलर स्नीज रिफ्लेक्स कहा जाता है। अनुमानित तौर पर 10 से 35 प्रतिशत जनसंख्या इस रिफ्लेक्स से प्रभावित है।