तनाव हमारे शरीर की स्थिति या जीवन में होने वाले प्रेशर की प्रतिक्रिया है। किसी व्यक्ति को तनाव क्यों होता है, वह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग हो सकता है, हमारी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार भी अलग होता है और हम किस तरह के वातावरण रहते हैं ये भी निर्धारित करता है। लेकिन आपको बता दें कि 'सेक्स' भी तनाव का मुख्य कारण बनता जा रहा है। जिसे 'सेक्स स्ट्रेस' भी कहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रेस लेवल बढ़ने के कारण शरीर के कई ऐसे हार्मोंस प्रभावित होते हैं, जिनकी वजह से सेक्स स्ट्रेस बढ़ जाता है। अगर पति-पत्नी अपनी रोजाना की जिंदगी का विश्लेषण करने के लिए कुछ समय निकाल सकें तो सेक्स स्ट्रेस का कारण समझा जा सकता है। सेक्स स्ट्रेस का कोई एक कारण नहीं है बल्कि कई ऐसी परिस्थितियां हैं जो इसका बड़ा कारण बन सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
व्यवसायिक जीवन में खुद को बेहतरीन साबित करने का जुनून, प्रमोशन की चाह के प्रयास में लोग अपनी सारी ऊर्जा खर्च कर देते हैं। अधिक आमदनी के लिए 8 की जगह 12-15 घंटे काम करना पड़ता है और आपके पास समय कम हो जाता है। ऐसे में ऑफिस के बाद कभी-कभी घर पर भी काम पूरा करना पड़ता है। इस तरह निजी जीवन में संतुलन बनाए रखना कठिन हो जाता है। जिम्मेदारियों को निभाने में व्यक्ति इतना थक जाता है कि बिस्तर पर लेटते ही सो जाता है और इसका सीधा असर उसकी सेक्स जीवन पर पड़ता है।
आज की शादीशुदा जिंदगी में पति-पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं। ऐसे में, रिश्तों में आजीवन साथ रह पाने की निश्चितता नहीं है। एक डर बना ही रहता है कि कब अलग होना पड़े क्योंकि दोनों के अहं होते हैं, जो कभी भी टकरा सकते हैं। दोनों में कोई भी समझौते के लिए तैयार नहीं होना चाहता है। इस तरह की स्थिति तनाव को जन्म देती है।
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आजकल लोग अपनी संयमित काम नहीं करते, बल्कि बाद में खींचातानी शुरू करते हैं। आधुनिक सुख-साधन जुटाना, रिसॉर्ट या विदेश में छुट्टियां बिताना हर दंपति की इच्छा होती है। आज विकल्प के रूप में लोन व क्रेडिट कार्ड की उपलब्धता व बाद में उनकी किश्तें चुकाने का प्रेशर शरीर व मन दोनों को थका डालता है, बिना प्लानिंग के जो वित्तीय तनाव झेलना पड़ता है, वो व्यक्ति के जीवन को बूरी तरह से प्रभावित करता है और सेक्स लाइफ के प्रति उदासीन कर देता है।
कामवासना संबंधी साहित्य, फोटो और फिल्म के प्रभाव के कारण व्यक्ति सेक्स लाइफ फैंटेसी की दुनिया से जुड़ जाता है। उस तरह की इच्छा करने लगता है, जबकि वास्तविकता उससे कहीं दूर होती है। ऐसी फैंटेसी के कारण पार्टनर का सेक्स स्ट्रेस बढ़ने लगता है। वे साथ होकर भी आनंद से वंचित रह जाते हैं। एक-दूसरे की उम्मीदों पर खरा न उतरने का भय रिश्तों में उदासीनता ले आता है।