कहते हैं दुनिया का सबसे बड़ा दर्द है जब एक मां अपने बच्चे को जन्म देती है। इससे बड़ा दर्द दुनिया में कोई हो नहीं सकता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के दौर में तकनीक इतनी ज्यादा आगे बढ़ चुकी है कि अब महिलाएं डिलीवरी के समय होने वाले इस दर्द से भी बच सकती हैं। इस तकनीक को एपिड्यूरल एनेस्थेसिया कहा जाता है, जो महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी के दौरान होने वाले दर्द से बचाने के लिए आजकल अस्पतालों में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा सवाल है, जो लोगों के मन में चलता है कि क्या मां और बच्चे के लिए प्रसव के दौरान एपिड्यूरल लेना गलत है? तो चलिए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।
क्या मां और बच्चे के लिए प्रसव के दौरान एपिड्यूरल लेना गलत है? जानें इसके बारे में सबकुछ
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डॉक्टर्स के मुताबिक, आजकल एपिड्यूरल एनेस्थेसिया लेना आम हो रहा है, ज्यादातर महिलाएं दर्द से बचने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करना चाहती हैं। यहां ये जानना जरूरी है कि एपिड्यूरल एनेस्थेसिया होता क्या है? दरअसल, ये एक प्रकार का इंजेक्शन है, जिसे लेबर पेन को कम करने के लिए लगाया जाता है। इसमें पेनकिलर यानी दर्द को कुछ समय तक रोकने वाली दवा को रीढ़ की हड्डी में दिया जाता है। ये पेट, पेल्विक एरिया और पैरों को प्रभावित करता है।
रीढ की हड्डी के बीच में एक खास जगह होती है, जिसे एपिडरल स्पेस कहते हैं। उस वजह पर एक एस्थेटिक दवा डाली जाती है। ये प्लास्टिक ट्यूब से बने एक छोटे कैथेटर के माध्यम से दिया जाता है। जिस वक्त महिलाओं को लेबर पेन हो रहा होता है, ठीक उसी वक्त इसे रीढ़ की हड्डी के अंदर और स्पाइनल कॉर्ड में दाखिल कराया जाता है। डिलीवरी के समय ऑक्सीटोसिन हार्मोन उत्पन्न होता है, जिसके साथ एपिड्यूरल छेड़छाड़ करता है और इसी वजह से प्रसव धीमा हो जाता है। ये प्रसव के दौरान प्रभावी ढंग से आपकी पुश करने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस दौरान आप कुछ भी महसूस नहीं कर पाते, ठीक वैसे जब आपको टांके लगाए जाते हैं।
इस तकनीक से भले ही महिलाओं को होने वाले दर्द में उन्हें राहत तो मिल जाती है, लेकिन एपिड्यूरल सभी महिलाओं के लिए ठीक नहीं है। जिन महिलाओं को पीठ में किसी प्रकार का इंफेक्शन होता है, जिन महिलाओं को पीठ में दर्द रहता है, जिनका ब्लड शुगर लेवल काफी ज्यादा लो हो। ऐसी महिलाओं को इस तकनीक का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उनके लिए एपिड्यूरल का इस्तेमाल करना जानलेवा तक हो सकता है।
यही नहीं, जो महिलाएं खून से जुड़ी किसी समस्या से पीड़ित हैं या फिर जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान नसों में खून के थक्के बनने से बचने के लिए ब्लड थिनर ले रही हैं। उन्हें भी इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। एपिड्यूरल तकनीक का इस्तेमाल करने के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं। जैसे- इसके इस्तेमाल से शरीर में कमजोरी हो सकती है, उल्टी हो सकती है, पेट में भारीपन की समस्या हो सकती है, सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है।
नोट: यह सलाह केवल आपको सामान्य जानकारी प्रदान करने के लिए दी गई है। आप किसी भी चीज का सेवन या कोई भी घरेलू उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।