देश में इन दिनों नवरात्रि का पर्व पूरे धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों की यह अवधि भारत में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता रखती है। इन दिनों में लोग मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार कई लोग इन नौ दिनों में उपवास भी रखते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक व्रत रखने के सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक लाभ भी हैं।
नवरात्रि 2021: व्रत रखना सेहत लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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पाचन तंत्र के लिए है फायदेमंद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक व्रत रखना पाचन तंत्र के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। जब हम कुछ भी खाते हों, चाहे वह स्वस्थ आहार हो या जंक फूड, हमारे पाचन तंत्र पर इसका दबाव पड़ता है। नवरात्रि के दौरान उपवास रखने का एक लाभ यह है कि इससे पाचन तंत्र को जरूरी ब्रेक मिल जाता है। उपवास, मल त्याग को नियंत्रित करने और कब्ज की समस्या को ठीक करने में भी मदद करता है।
वजन घटाने में मिलती है मदद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सही तरीके से अभ्यास किया जाए तो उपवास, वजन घटाने में भी मदद करता है। नवरात्रि व्रत में फल, कुट्टू के आटे के साथ तिल के लड्डू, आलू और दही का सेवन किया जाता है। यह सभी कई प्रकार के विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, स्वस्थ वसा और प्रोबायोटिक्स का एक संयोजन होता है, जिसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। व्रत में सेवन किए जाने वाले आहार कैलोरी की मात्रा को कम करते हुए शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं, जिससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है।
शरीर का होता है डिटॉक्सिफिकेशन
उपवास की आदत, शरीर को उन सभी विषाक्त पदार्थों से डिटॉक्स करने में मदद करता है जो समय के साथ भोजन, पानी और वायु प्रदूषण के सेवन से जमा होते हैं। ये सूजन और कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। उपवास रखकर शरीर से इन सभी विषाक्त पदार्थों को आसानी से बाहर निकला जा सकता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए इसका समय-समय पर डिटॉक्सिफिकेशन आवश्यक होता है।
व्रत रखने के अन्य फायदे
व्रत रखना इंसुलिन संबंधी समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य रोगियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन के अपर्याप्त स्तर या इंसुलिन प्रतिरोध को सुधारने के लिए व्रत रखना फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा साल 2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार उपवास, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने के साथ संज्ञानात्मक स्वास्थ्य में सुधार करते हुए अवसाद और तनाव के जोखिम को भी कम करने में सहायक माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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