तमाम मीडिया रिपोर्ट्स भारतीय महिलाओं में स्वास्थ्य देखभाल की महत्वपूर्ण चुनौतियों को लेकर अलर्ट करते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारतीय महिलाओं में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा देखा जाता रहा है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को इनका प्रमुख कारक माना जाता रहा है। कई रिपोर्ट्स बताते हैं, खासकर ग्रामीण भारतीय महिलाओं को आहार से शरीर के लिए जरूरी पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, जो उनमें कुपोषण और एनीमिया के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
International Women's Day: महिलाओं में इन चार बीमारियों का जोखिम होता है अधिक, इनमें से दो हो सकती हैं जानलेवा
हृदय रोग और इसकी गंभीरता का खतरा
हृदय रोग, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारकों में से एक है, भारतीय महिलाओं में भी इसका जोखिम देखा जाता रहा है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि हृदय रोग पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अलग तरह से भी प्रभावित करते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, गर्भकालीन मधुमेह और गर्भावस्था की अन्य जटिलताएं भी बाद में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
हड्डियों की बीमारी
महिलाओं में पोषण की कमी और लाइफस्टाइल से संबंधित समस्याओं के कारण हड्डियों से संबंधित दिक्कतें भी बढ़ती हुई देखी जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र की महिलाएं भी हड्डियों में दर्द और कमजोरी की शिकार देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हड्डियों के घनत्व में तेजी से कमी आने की जोखिम रहता है। विशेषतौर पर मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन के स्तर में कमी के कारण हड्डियों में पतलापन, इसकी संरचना की दिक्कत और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम काफी बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस से हड्डियों में फ्रैक्चर होने और गंभीर जोड़ों के दर्द का खतरा भी बढ़ सकता है।
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की हो सकती हैं शिकार
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) भी महिलाओं की सेहत के लिए बड़ी चुनौती रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 90 फीसदी महिलाओं को कभी न कभी यूटीआई होने का खतरा रहता है। बैक्टीरियल संक्रमण को यूटीआई का सबसे आम कारण माना जाता है। महिलाओं की शारीरिक संरचना उन्हें यूटीआई से संक्रमित होने के लिए और जोखिम कारक बनी देती है। यूटीआई पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इससे किडनी में क्षति का भी जोखिम रहता है।
ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर का जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के जोखिम अधिक देखे जाते रहे हैं। सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स में होने वाला कैंसर है जो मृत्यु के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ये टीके इस कैंसर के कारक एचपीवी वायरस के प्रसार और इसके कारण होने वाले जोखिमों से बचाने में मददगार हो सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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