कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारी है। आमतौर पर माना जाता है कि ये बीमारी सिर्फ युवाओं और वयस्कों को होती है, हालांकि बच्चों में बढ़ता कैंसर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की लिए लगातार मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। खराब जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रदूषण, खान-पान की गड़बड़ आदतें और जेनेटिक कारणों को बच्चों में बढ़ते कैंसर के लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार माना जाता है। बच्चों में कैंसर इसलिए और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि कम उम्र में होने वाला कैंसर न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करता है।
Cancer Risk: हर साल भारत में 50 हजार बच्चे हो रहे कैंसर का शिकार, जानिए किस कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा
Baccho Me Cancer: भारतीय बच्चों में कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। 15 साल से कम उम्र के बच्चों में हर साल लगभग 50,000 के करीब मामले रिपोर्ट किए जाते हैं, जो देश में सभी कैंसर के मामलों का 3-5% है। बच्चों में बढ़ते कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए 15 फरवरी को इंटरनेशनल चाइल्डहुड कैंसर डे मनाया जाता है।
बच्चों में बढ़ता कैंसर का खतरा
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में 15 साल से कम उम्र के बच्चों में हर साल लगभग 50,000 के करीब मामले रिपोर्ट किए जाते हैं, जो देश में सभी कैंसर के मामलों का 3-5% है। ल्यूकेमिया (40%), लिम्फोमा और ब्रेन ट्यूमर बच्चों में सबसे आम प्रकार का कैंसर है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में, दुनियाभर में 2.75 से ज्यादा बच्चों और किशोरों (0-19 साल की उम्र) में कैंसर का पता चला।
- करीब 1.05 लाख बच्चों की इस साल कैंसर से मौत हो गई। हालांकि, असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई देशों में बच्चों में कैंसर का पता लगाना मुश्किल होता है।
- बच्चों में कैंसर का संबंध अधिकतर जेनेटिक कारणों और इम्यून सिस्टम से होता है, न कि लाइफस्टाइल से।
भारतीय बच्चों में बढ़ी कैंसर के बाद जीवित रहने की दर
एम्स दिल्ली के पीडियाट्रिक विभाग की ऑन्कोलॉजी इकाई प्रमुख डॉ. रचना सेठ के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में अच्छी खबर सामने आई है। द लैंसेट जर्नल हेल्थ में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाज के पांच साल बाद करीब 95 फीसदी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
- 2016 से 2024 के बीच देशभर के 20 केंद्रों में ये अध्ययन किया गया।
- इसमें 18 वर्ष तक के 5419 कैंसर सर्वाइवर बच्चों को शामिल किया गया।
- पूरे समूह में पांच वर्ष तक कुल सर्वाइवल दर 94.5 फीसदी रही और 89.9 फीसदी बच्चे बीमारी से मुक्त रहे।
- दो वर्षों तक पोस्ट ट्रीटमेंट फॉलोअप लेने वाले 2266 बच्चों में पांच साल तक सर्वाइवल दर 98.2% रही।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बच्चों में सबसे ज्यादा ल्यूकेमिया कैंसर (30-35%) का खतरा देखा जाता है, जिसमें एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया सबसे आम है।
- ल्यूकेमिया एक प्रकार का ब्लड कैंसर है जो बोन मैरों में शुरू होता है। इस कैंसर में श्वेत रक्त कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं।
- इसके बाद ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के ट्यूमर बचपन के कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण हैं जो 20-25% मामलों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
- लिम्फोमा (10-15%) का खतरा भी बच्चों में देखा जा रहा है, जिसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधान करते हैं।
- हॉजकिन लिंफोमा (12.9%), रेटिनोब्लास्टोमा (7.4%), बोन ट्यूमर (8.4%), किडनी ट्यूमर (4.61%) सहित अन्य कैंसर बच्चों में देखे जा रहे हैं।
बच्चों को कैंसर से बचाएं कैसे?
अब सवाल ये है कि बच्चों को कैंसर से कैसे बचाया जा सकता है?
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में कैंसर के लिए मुख्यरूप से प्रदूषित हवा और पानी, कीटनाशकों और रसायनों के ज्यादा संपर्क को जिम्मेदार पाया जा रहा है।
- प्रोसेस्ड फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी और मोटापा ने भी इसका खतरा बढ़ा दिया है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच कराकर इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- जिन बच्चों में आनुवांशिक रूप से कैंसर का जोखिम होता है, उनमें कुछ टेस्ट के माध्यम से समय पर निदान और इलाज को बेहतर बनाया जा सकता है।
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स्रोत:
Long term outcomes of the Indian childhood cancer survivorship (C2S) cohort: a multicentre study (2016–2024)
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